गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने नाथ संप्रदाय की सदियों पुरानी परंपरा का पालन किया। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले आदिगुरु महायोगी गोरखनाथ और अन्य गुरुजनों की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद मंदिर परिसर में स्थित विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों और नाथ योगियों की समाधि स्थलों पर भी श्रद्धा अर्पित की। गुरु पूर्णिमा नाथ संप्रदाय का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है और इस दिन गुरु परंपरा का विशेष सम्मान किया जाता है। गोरक्षपीठ में हर वर्ष यह आयोजन बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी शामिल होते हैं।
गुरु का सम्मान किया, फिर अपने शिष्यों को दिया आशीर्वाद
गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर योगी आदित्यनाथ दो अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आए। एक ओर उन्होंने अपने गुरु और नाथ परंपरा के महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया, वहीं दूसरी ओर गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में अपने शिष्यों और अनुयायियों को आशीर्वाद भी दिया। पूजा के बाद उन्होंने गुरु गोरक्षनाथ को पारंपरिक रूप से रोट अर्पित किया और सभी धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। इसके बाद मंदिर पहुंचे शिष्यों को तिलक लगाकर उनका स्वागत किया और उन्हें आशीर्वचन दिए। मंदिर परिसर में सहभोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और अनुयायी शामिल हुए। इसी अवसर पर 23 जुलाई से चल रही श्रीराम कथा का भी विधिवत समापन किया गया।
नाथ परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना जाता है
नाथ संप्रदाय की मान्यता के अनुसार गुरु और ईश्वर में कोई अंतर नहीं माना जाता। इसी कारण गुरु पूर्णिमा का पर्व इस परंपरा में विशेष महत्व रखता है। गोरखनाथ मंदिर में यह उत्सव तीन दिनों तक मनाया जाता है और देशभर से साधु-संत तथा श्रद्धालु इसमें भाग लेने पहुंचते हैं। योगी आदित्यनाथ हर वर्ष इस अवसर पर अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं और उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराते हैं। माना जाता है कि महायोगी गोरखनाथ से शुरू हुई यह गुरु परंपरा लगातार आगे बढ़ती रही है और आज भी उसी श्रद्धा और अनुशासन के साथ निभाई जा रही है। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नाथ परंपरा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
शिक्षा, सेवा और समाज कल्याण से भी जुड़ी है गोरक्षपीठ की पहचान
गोरक्षपीठ केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में भी लंबे समय से सक्रिय रही है। मंदिर से जुड़ी संस्थाओं ने समय-समय पर शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और उनके बाद महंत अवेद्यनाथ ने समाज कल्याण के लिए अनेक संस्थानों की स्थापना की, जिन्हें आगे बढ़ाने का कार्य वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। आज गोरक्षपीठ से जुड़े शिक्षण संस्थान, विश्वविद्यालय और चिकित्सा सेवाएं पूर्वांचल के लाखों लोगों को लाभ पहुंचा रही हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम एक बार फिर इस बात का प्रतीक बना कि गोरक्षपीठ धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ सामाजिक सेवा और जनकल्याण के कार्यों को भी समान महत्व देती है।
