मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड की मुख्य आरोपी मुस्कान इन दिनों जेल के भीतर अलग ही मानसिक स्थिति से गुजर रही है। मामले की सुनवाई जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे उसके मन में सजा को लेकर चिंता भी बढ़ती जा रही है। जेल से मिली जानकारी के अनुसार, मुस्कान अब नियमित रूप से सुबह और शाम पूजा-पाठ करती है। वह सुंदरकांड का पाठ भी कर रही है और भगवान से अपने लिए दया की प्रार्थना करती है। बताया जा रहा है कि वह कठोर सजा, खासकर फांसी की सजा से बचने की कामना कर रही है। जेल में उसकी बदली हुई दिनचर्या अब चर्चा का विषय बन गई है और इस मामले पर नजर रखने वाले लोग भी इसे लेकर कई तरह की बातें कर रहे हैं।
बेटी का नाम बदलकर रखा ‘मन्नत’, उसी की देखभाल में बीत रहा समय
जेल प्रशासन के मुताबिक, मुस्कान इस समय अपनी छोटी बेटी की देखभाल में सबसे अधिक समय बिताती है। बताया गया है कि पहले बच्ची का नाम राधा था, लेकिन अब उसका नाम बदलकर ‘मन्नत’ रखा गया है। माना जा रहा है कि यह नाम उसकी भगवान से की गई प्रार्थनाओं और नई उम्मीद का प्रतीक है। चूंकि बच्ची अभी बहुत छोटी है, इसलिए मुस्कान को जेल के अन्य कैदियों की तरह कोई नियमित काम नहीं दिया गया है। वह अपना अधिकतर समय बेटी की देखभाल, पूजा-पाठ और अदालत से आने वाली अगली तारीख का इंतजार करने में बिताती है। जेल अधिकारियों का कहना है कि छोटे बच्चों की देखभाल से जुड़े नियमों के तहत उसे यह सुविधा दी गई है।
परिवार से दूरी और अदालत के फैसले का इंतजार
गिरफ्तारी के बाद से अब तक मुस्कान से मिलने उसके परिवार का कोई सदस्य जेल नहीं पहुंचा है। ऐसे में उसकी दुनिया अब केवल उसकी बेटी और जेल की चारदीवारी तक सीमित हो गई है। दूसरी ओर, मामले में कानूनी प्रक्रिया भी लगातार आगे बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार, सह-आरोपी साहिल के भाई की ओर से हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिस पर आगे सुनवाई होनी है। हालांकि, इस याचिका के विषय में अभी आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल सभी की नजर अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि इस मामले का फैसला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है।
पूरे देश में चर्चा में रहा था नीला ड्रम हत्याकांड
मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड अपनी क्रूरता और सनसनीखेज घटनाक्रम के कारण देशभर में सुर्खियों में आया था। जांच पूरी होने के बाद अब मामला अदालत में अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में जेल के भीतर मुस्कान की बदली हुई दिनचर्या, धार्मिक गतिविधियां और बेटी के साथ बिताया जा रहा समय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला अदालत को ही सुनाना है और जब तक निर्णय नहीं आता, तब तक आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेगी। कानून के अनुसार, किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जाता जब तक अदालत अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देती।
