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आखिर सरकार से क्या हुई बात? संसद मार्च के बीच अभिजीत दीपके ने अचानक खत्म कर दी भूख हड़ताल

जंतर-मंतर पर ढाई दिन की भूख हड़ताल के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनशन खत्म कर दिया। संगठन ने सरकार के साथ बातचीत का दावा किया है। जानिए क्या हैं आंदोलन की मुख्य मांगें और आगे क्या हो सकता है।

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। संसद मार्च के दौरान उन्होंने करीब ढाई दिन तक चले अनशन को खत्म करने का ऐलान किया। अनशन समाप्त करने के समय मंच पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि भी मौजूद रहीं। इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसके बाद दीपके ने अपना अनशन खत्म करने का निर्णय लिया। CJP का दावा है कि सरकार की ओर से बातचीत के लिए पहल की गई है और इसी के बाद आंदोलन के अगले चरण को लेकर रणनीति में बदलाव किया गया है। हालांकि संगठन ने साफ किया कि उनकी प्रमुख मांगों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है और आंदोलन की दिशा आगे की बातचीत पर निर्भर करेगी।

सरकार से बातचीत का दावा, प्रतिनिधिमंडल पहुंचा वार्ता के लिए

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने बातचीत के लिए उनके प्रतिनिधियों को बुलाया है। संगठन की ओर से प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष राकां वार्ता में शामिल होने पहुंचे। CJP के मुताबिक, सरकार की तरफ से स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि सरकार की ओर से इस बैठक के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। संगठन का कहना है कि वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मामलों पर ठोस कदम चाहता है। CJP ने यह भी कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है तो आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा, लेकिन यदि मांगों पर संतोषजनक प्रगति नहीं होती है तो आंदोलन का अगला चरण भी शुरू किया जा सकता है।

 सोनम वांगचुक ने भी रखी थी शर्त, शिक्षा व्यवस्था पर जवाबदेही की मांग

अभिजीत दीपके से पहले छात्र संगठनों से जुड़े कुछ प्रदर्शनकारी भी अपना अनशन समाप्त कर चुके थे। वहीं सोनम वांगचुक ने अस्पताल से संदेश देते हुए कहा था कि यदि सरकार या विपक्ष यह भरोसा दिलाए कि संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था की खामियों और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रभावी चर्चा होगी तथा जवाबदेही तय की जाएगी, तो वह भी अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाना है। इसी वजह से आंदोलन के दौरान शिक्षा सुधार और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग लगातार दोहराई गई।

 संसद मार्च को मिला विपक्ष का समर्थन

जंतर-मंतर से संसद की ओर निकले मार्च में बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी और विभिन्न राज्यों से आए युवा शामिल हुए। इस प्रदर्शन को कई विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिला। समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य दलों के कई नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की। सांसद डिंपल यादव, महुआ मोइत्रा, मनीष सिसोदिया, आतिशी, गोपाल राय, चंद्रशेखर आजाद और अभिनेता प्रकाश राज भी प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे। आंदोलन में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। अब सभी की नजर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत के नतीजों पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि वार्ता से कोई ठोस समाधान निकलता है या आंदोलन फिर से तेज होगा।

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