नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। आसाराम की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही है और बेहतर इलाज के लिए उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए। इस मांग पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया और राजस्थान सरकार से उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा। अदालत ने साफ संकेत दिया कि किसी भी निर्णय से पहले वास्तविक मेडिकल स्थिति जानना जरूरी है।
स्वास्थ्य को लेकर सरकार और बचाव पक्ष के दावों में अंतर
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार आसाराम की हालत फिलहाल स्थिर है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ महीने पहले आसाराम धार्मिक स्थलों की यात्रा पर गए थे और वहां सामान्य रूप से चल-फिर रहे थे। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी सभी ताजा दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड एकत्र कर अदालत के समक्ष पेश किए जाएंगे। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष का दावा है कि उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें विशेष चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है। इसी वजह से अंतरिम जमानत की मांग की गई है ताकि उनका समुचित इलाज कराया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले सच्चाई सामने आनी चाहिए
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत किसी भी व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि मेडिकल रिपोर्ट से यह साबित होता है कि आसाराम की हालत गंभीर है और उन्हें विशेष इलाज की जरूरत है, तो अदालत इस पहलू पर विचार कर सकती है। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि केवल दावों के आधार पर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। मेडिकल रिपोर्ट और सरकारी जवाब आने के बाद ही यह तय होगा कि अंतरिम जमानत की जरूरत है या नहीं। अदालत ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया है कि वह स्वास्थ्य संबंधी सभी तथ्यों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
2013 से जेल में बंद हैं आसाराम
आसाराम से जुड़ा यह मामला वर्ष 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का आरोप सामने आया था। शिकायत दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। अप्रैल 2018 में जोधपुर की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब से वह जेल में बंद हैं। अब उनकी अंतरिम जमानत याचिका को लेकर एक बार फिर यह मामला चर्चा में है। सुप्रीम Court ने राजस्थान सरकार को 21 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का समय दिया है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें अस्थायी राहत दी जाए या नहीं। फिलहाल इस मामले पर सभी की नजर आगामी सुनवाई और मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
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