जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने इस मुद्दे को लेकर 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद राज्य का दर्जा अब तक बहाल नहीं किया गया है। इसी को लेकर जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज बुलंद करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन दिलाने के लिए पार्टी नेतृत्व ने देशभर के प्रमुख राजनीतिक नेताओं से भी संपर्क शुरू कर दिया है।
फारूक अब्दुल्ला ने 52 नेताओं को भेजा निमंत्रण
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने देश के 52 प्रमुख राजनीतिक नेताओं को पत्र लिखकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। आमंत्रित नेताओं में कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के प्रमुख चेहरे शामिल हैं। पार्टी का उद्देश्य इस मुद्दे को केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित न रखकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाना है। पत्र में नेताओं से अपील की गई है कि वे राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन करें और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुटता दिखाएं। राजनीतिक गलियारों में इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे विभिन्न दलों के बीच इस मुद्दे पर एक साझा मंच बनने की संभावना दिखाई दे रही है।
देरी पर उठे सवाल, लोकतांत्रिक अधिकारों की बात
अपने पत्र में फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा दिखाते हुए चुनावों में भाग लिया और एक निर्वाचित सरकार को चुना। उनका तर्क है कि जब क्षेत्र में लोकतांत्रिक व्यवस्था सामान्य रूप से काम कर रही है, तब राज्य का दर्जा बहाल करने में लगातार देरी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर न तो कोई स्पष्ट समय-सीमा बताई गई है और न ही कोई ठोस जानकारी सामने आई है। उनके अनुसार यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। पार्टी का मानना है कि राज्य का दर्जा बहाल होने से लोकतांत्रिक संस्थाएं और अधिक मजबूत होंगी तथा लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा।
जंतर-मंतर से जाएगा राजनीतिक संदेश
20 जुलाई को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगा। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन वादों को याद दिलाने का प्रयास है जो संसद और सरकार की ओर से पहले किए गए थे। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों, सामाजिक नेताओं और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न संगठनों को आमंत्रित किया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि देश के कितने बड़े नेता इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं और इस मुद्दे पर क्या राजनीतिक संदेश निकलकर सामने आता है। फिलहाल, 20 जुलाई का यह प्रदर्शन राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है।
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