ईरान की राजधानी तेहरान इस समय एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है, जहां दुख और बदले की भावना एक साथ उबल रही है। तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता खामेनेई का पार्थिव शरीर रखा गया है, जो ईरान के राष्ट्रीय ध्वज से लिपटा हुआ है। लेकिन ईरान सरकार के लिए यह सिर्फ एक पारंपरिक शोक समारोह नहीं है, बल्कि इसे एक बहुत बड़े राजनीतिक और रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में खत्म हुए युद्ध के बाद, ईरान पूरी दुनिया को अपनी अटूट ताकत और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना चाहता है। राजधानी की हर प्रमुख सड़क और चौराहों पर अरबी, फारसी और अंग्रेजी में ‘We Must Rise’ (हमें उठना होगा) जैसे बड़े-बड़े बैनर लगाए गए हैं। इन संदेशों के जरिए सरकार अपनी जनता को इस्लामिक गणराज्य के समर्थन में एकजुट रहने और हर विपरीत परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार कर रही है।
एक ही मंच पर पूरे परिवार के ताबूत: हवाई हमले की वो दर्दनाक दास्तां
इस समारोह का सबसे भावुक और झकझोर देने वाला पहलू वह था, जब खामेनेई के ताबूत के ठीक बगल में उनके उन परिजनों के ताबूत भी रखे गए, जिन्होंने युद्ध के पहले ही दिन हुए एक भीषण हवाई हमले में अपनी जान गंवा दी थी। इन ताबूतों में खामेनेई के दामाद, उनकी बड़ी बेटी, महज 14 महीने की मासूम पोती और ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की पत्नी के शव शामिल थे। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में मौजूद हजारों लोगों की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं। इस दौरान वहां एक बेहद भावुक धार्मिक परंपरा भी देखने को मिली, जब शोक में डूबे आम लोग और समर्थक अपने स्कार्फ और कपड़ों को ताबूतों से स्पर्श करा रहे थे। ईरान की संस्कृति में इस प्रक्रिया को ‘तबर्रुक’ या पवित्र आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
‘या हुसैन’ और बदले का संकल्प: जब ताबूत पर ओढ़ाया गया लाल झंडा
जैसे-जैसे जनाजे की रस्में आगे बढ़ीं, माहौल में एक गंभीर और कड़ा रणनीतिक मोड़ आ गया। थोड़ी देर बाद खामेनेई के ताबूत से राष्ट्रीय ध्वज हटाकर उसे गहरे लाल रंग के झंडे से ढक दिया गया, जिस पर बड़े अक्षरों में ‘या हुसैन’ लिखा हुआ था। शिया इस्लामी परंपरा में लाल झंडा कोई साधारण कपड़ा नहीं है; यह सीधे तौर पर अन्याय के खिलाफ अंतिम सांस तक संघर्ष करने और अपनों के खून का बदला लेने के कड़े संकल्प को दर्शाता है। इस लाल झंडे ने यह साफ कर दिया है कि ईरान भले ही युद्ध से उबर रहा हो, लेकिन उसने अपने दुश्मनों को माफ नहीं किया है। यह लाल झंडा वैश्विक ताकतों के लिए एक सीधा और खुला इशारा है कि ईरान आने वाले दिनों में किसी भी चुनौती का आक्रामक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कमांडर अहमद वाहिदी की वापसी: अमेरिका के साथ गुप्त समझौते की सुगबुगाहट
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा हलचल ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर जनरल अहमद वाहिदी की मौजूदगी ने मचाई। जनरल वाहिदी कई महीनों से पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से गायब थे, लेकिन इस बेहद महत्वपूर्ण मौके पर उनका अचानक सामने आना कई बड़े संकेत दे रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के बाद अब अमेरिका के साथ होने वाले संभावित समझौतों और ईरान की नई सुरक्षा रणनीति को तय करने में वाहिदी की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। उनकी इस मौजूदगी ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि ईरान का शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पूरी तरह एकजुट है और वह किसी भी कूटनीतिक टेबल पर अपनी शर्तों पर ही बात करेगा।
Read more-राम मंदिर में ‘चोरी’ पर आर-पार! दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान- ‘अयोध्या जाकर करूंगा केस’
