पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया सियासी विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेताओं के एक गुट ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर दावा किया है कि पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा विधायक उनके समर्थन में हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बागी गुट का कहना है कि उन्होंने पहले ही चुनाव आयोग को पत्र भेजकर अपनी नई राष्ट्रीय समिति की जानकारी दे दी थी और अब अपनी बात आधिकारिक रूप से आयोग के सामने रखी है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर विवाद और बढ़ सकता है। हालांकि, इन दावों पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग और संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट होगा।
बागी नेताओं ने परिवारवाद और भ्रष्टाचार के लगाए आरोप
चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद बागी नेता रितब्रत बनर्जी ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि TMC पार्टी में बढ़ते परिवारवाद, तानाशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ है। उनका आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने मूल सिद्धांतों से दूर हो गई है और पार्टी का संचालन कुछ लोगों तक सीमित होकर रह गया है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में विधायक, पार्षद और जिला परिषद के सदस्य उनके साथ हैं। रितब्रत बनर्जी ने यह भी कहा कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है और इसी आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग से अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी नजर में पार्टी की असली पहचान वही लोग हैं जो संगठन के मूल विचारों के साथ खड़े हैं।
64 विधायकों के समर्थन का दावा
बागी गुट का दावा है कि 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 64 विधायक उनके समर्थन में हैं। वहीं, उनका कहना है कि मौजूदा नेतृत्व के साथ केवल सीमित संख्या में विधायक बचे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम के बीच विधानसभा में सौंपे गए कुछ प्रस्तावों पर किए गए हस्ताक्षरों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षरों में गड़बड़ी हुई है। इसी मामले की जांच राज्य की अपराध जांच एजेंसी (CID) कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस विवाद की सच्चाई सामने आएगी।
निलंबन, जांच और राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ा विवाद
हस्ताक्षरों से जुड़े विवाद के सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके बाद बागी गुट ने खुद को बहुमत वाला गुट बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष के सामने नया प्रस्ताव पेश किया। बागी नेताओं का दावा है कि उनके प्रस्ताव को स्वीकार भी किया गया। हालांकि, इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। फिलहाल इस विवाद का अंतिम परिणाम संवैधानिक संस्थाओं की जांच, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और कानूनी फैसलों पर निर्भर करेगा। ऐसे में पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
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