इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। इस मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती देने के लिए अब राजा रघुवंशी का परिवार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने कहा कि उनका परिवार इंसाफ की लड़ाई हर स्तर पर लड़ेगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी, ताकि सोनम की जमानत रद्द कराई जा सके। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वे कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। इसके लिए निजी वकील की मदद भी ली जाएगी।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
राजा रघुवंशी के भाई ने इस पूरे मामले में मेघालय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के समय कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया, जिसका फायदा आरोपी को मिला। उन्होंने कहा कि यह समझ से बाहर है कि इतनी गंभीर जांच में ऐसी चूक कैसे हो सकती है। परिवार का मानना है कि यदि शुरुआत से सभी कानूनी नियमों का पालन किया जाता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। अब उनका कहना है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से आरोपी को राहत मिली है और इसका असर पूरे मामले पर पड़ा है।
हाईकोर्ट ने क्यों बरकरार रखी जमानत?
मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत द्वारा सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी नहीं दी गई। अदालत के अनुसार यह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47(1) और संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत दिए गए अधिकारों का उल्लंघन माना गया। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के समय उसके अधिकारों की जानकारी देना कानूनन जरूरी है और इस प्रक्रिया में हुई चूक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत को बरकरार रखा।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद अब इस मामले की अगली बड़ी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है। राजा रघुवंशी का परिवार पूरी तैयारी के साथ कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की बात कह रहा है। दूसरी ओर, इस मामले पर लोगों की नजर भी बनी हुई है क्योंकि यह देश के चर्चित मामलों में शामिल है। यदि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होती है, तो वहां यह तय होगा कि हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा जाएगा या फिर जमानत पर दोबारा विचार होगा। फिलहाल, परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल न्याय पाना है और वे कानून के दायरे में रहकर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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