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विमान सुरक्षा पर सरकार का बड़ा फैसला: 9 केंद्र शासित प्रदेशों में अचानक क्यों बढ़ी विशेष अदालतों की जरूरत?

केंद्र सरकार ने विमान सुरक्षा मामलों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 9 केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अदालतें बनाई जा सकेंगी। जानिए पूरा नियम और इसका असर।

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केंद्र सरकार ने विमानन सुरक्षा से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। अब देश के केंद्र शासित प्रदेशों में जरूरत पड़ने पर विशेष अदालतों का गठन आसानी से किया जा सकेगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख समेत कुल 9 केंद्र शासित प्रदेशों में विमान सुरक्षा कानून के तहत मामलों की सुनवाई के लिए अलग अदालतें बनाई जा सकती हैं। इस फैसले के बाद इन क्षेत्रों के उपराज्यपाल और प्रशासकों को वह अधिकार मिल गया है जो सामान्य तौर पर राज्य सरकारों के पास होता है। इससे अब किसी भी गंभीर मामले में अदालत गठन की प्रक्रिया में देरी नहीं होगी और तुरंत न्यायिक व्यवस्था बनाई जा सकेगी।

 कानूनी उलझन खत्म: अब नहीं रुकेगा विशेष अदालतों का गठन

अब तक केंद्र शासित प्रदेशों में एक बड़ी कानूनी दिक्कत यह थी कि वहां राज्य सरकार की तरह पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था नहीं होती। विमान सुरक्षा से जुड़े विशेष कानूनों के तहत अदालत बनाने का अधिकार केवल राज्य सरकारों के पास था, जिसके कारण दिल्ली, चंडीगढ़ और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। नए आदेश के बाद यह कानूनी खालीपन खत्म हो गया है। अब उपराज्यपाल और प्रशासक अपने-अपने क्षेत्र में जरूरत के अनुसार विशेष अदालत बनाने का निर्णय ले सकेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि संवेदनशील मामलों की सुनवाई बिना देरी के शुरू हो सके और कानूनी प्रक्रिया बाधित न हो।

कौन से कानून के तहत लिया गया यह फैसला? 

यह पूरी व्यवस्था ‘सिविल विमानन सुरक्षा विधि विरुद्ध कार्य दमन अधिनियम, 1982’ के तहत लागू की जा रही है। यह कानून उन मामलों को नियंत्रित करता है जहां विमान या हवाई सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता है या किसी प्रकार की हिंसा या साजिश की जाती है। यह कानून 1971 के मॉन्ट्रियल समझौते को लागू करने के लिए बनाया गया था, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमानन सुरक्षा को मजबूत करना है। सरकार का कहना है कि यह कदम किसी नई सख्ती की शुरुआत नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद कानूनों को बेहतर तरीके से लागू करने की व्यवस्था है।

हाईकोर्ट की मंजूरी अनिवार्य

सरकार ने इस प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखने के लिए एक अहम शर्त भी जोड़ी है। अब कोई भी उपराज्यपाल या प्रशासक अपने स्तर पर अकेले विशेष अदालत का गठन नहीं कर सकेगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति लेना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालतों का गठन पूरी तरह पारदर्शी और न्यायिक निगरानी के तहत हो। सरकार का दावा है कि इस कदम से विमान सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी से होगी और संवेदनशील मामलों में न्याय प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी। हालांकि अभी तक किसी भी केंद्र शासित प्रदेश में नई अदालत का गठन नहीं हुआ है, लेकिन यह आदेश भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लागू किया गया है।

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