भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में हर दिन नए सवाल सामने आ रहे हैं। अब इस मामले में उस पुलिस अधिकारी की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जो पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे। राज्य सरकार ने संबंधित एसडीपीओ राजेश शर्मा को लाइन हाजिर करते हुए पुलिस मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मृतक के परिजनों की शिकायत पर उनके खिलाफ हत्या समेत गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। इस कार्रवाई के बाद लोगों के बीच यह चर्चा और तेज हो गई है कि आखिर एनकाउंटर के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। मामले की जांच जारी है और प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी लगातार समीक्षा की जा रही है।
ग्रामीणों का दावा- भरोसा दिलाकर कराया गया था सरेंडर
घटना को लेकर गांव के लोगों और परिजनों की ओर से कई दावे किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि भरत तिवारी और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही थी। इसी दौरान उसे भरोसा दिलाया गया कि उसकी बात सुनी जाएगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे कदम उठाए जाएंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि इस भरोसे के बाद भरत ने अपना हथियार छोड़ दिया और आत्मसमर्पण कर दिया। लोगों का कहना है कि सरेंडर के बाद स्थिति सामान्य दिखाई दे रही थी और किसी टकराव जैसी परिस्थिति नहीं थी। हालांकि इसके कुछ ही समय बाद घटनाक्रम पूरी तरह बदल गया। इसी वजह से अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि आत्मसमर्पण हो चुका था तो फिर हालात अचानक इतने गंभीर कैसे हो गए। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल, जांच पर टिकी निगाहें
मामले में ग्रामीणों और परिजनों की ओर से कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका कहना है कि घटना के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। दूसरी तरफ पुलिस का पक्ष यह रहा है कि कार्रवाई नियमों के तहत और परिस्थितियों को देखते हुए की गई। दोनों पक्षों के दावों में अंतर होने के कारण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है। लोगों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था। इस बीच मामले से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा जारी है और अलग-अलग स्तर पर तथ्य जुटाए जा रहे हैं। प्रशासन भी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कह रहा है ताकि सभी सवालों के जवाब सामने आ सकें।
एफआईआर दर्ज होने के बाद बढ़ा दबाव, कई अधिकारियों की भूमिका पर नजर
भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में कुछ अधिकारियों को नामजद किया गया है, जबकि अन्य संबंधित कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस बीच चर्चा यह भी है कि मामले से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। भरत तिवारी स्थानीय मुद्दों, खासकर बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे थे। यही वजह है कि उनकी मौत के बाद यह मामला सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े जनचर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर जांच प्रक्रिया पर टिकी है और लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर उस दिन की पूरी सच्चाई क्या थी।
