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15 छात्रों की मौत के बाद प्रशासन ने शुरू किया एक्शन, ‘Physics Wallah’ समेत 22 कोचिंग संस्थान पर गिरी गाज

लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में KDA ने बड़ा एक्शन लिया है। काकादेव में Physics Wallah समेत 22 कोचिंग संस्थान सील किए गए। जानें पूरी कार्रवाई और कारण।

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लखनऊ के अलीगंज इलाके में कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने शहर के काकादेव कोचिंग हब में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान में सुरक्षा मानकों और भवन नियमों की अनदेखी करने वाले कई कोचिंग संस्थानों पर शिकंजा कसा गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद शिक्षा संस्थानों में हड़कंप मच गया है और छात्रों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

 किन-किन संस्थानों पर गिरी कार्रवाई की गाज?

KDA की टीम ने जांच के दौरान कई कोचिंग संस्थानों में गंभीर खामियां पाईं, जिनमें अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी, भवन मानचित्र की अनियमितता और आपातकालीन निकास व्यवस्था का अभाव शामिल है। इसके बाद तत्काल प्रभाव से कुल 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। इनमें प्रमुख कोचिंग संस्थान ‘Physics Wallah’ का नाम भी शामिल है, जिसे जोनवार कार्रवाई के तहत सील किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल प्रारंभिक चरण है और आगे भी जांच जारी रहेगी।

जोनवार जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ियां

प्राधिकरण द्वारा जारी जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई शहर के विभिन्न जोन में की गई है। जोन-1 में 3, जोन-2बी में 5, जोन-3 में 3 और जोन-4 में 5 संस्थानों को सील किया गया है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी निरीक्षण कर कुल 22 संस्थानों को प्रथम चरण में चिन्हित किया गया। जांच टीमों ने पाया कि कई कोचिंग सेंटर बिना आवश्यक फायर सेफ्टी सिस्टम और वैध अनुमति के संचालित हो रहे थे, जिससे छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना हुआ था।

आगे और कड़ी कार्रवाई के संकेत

KDA अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में शहर के सभी कोचिंग संस्थानों की गहन जांच की जाएगी। जो भी संस्थान भवन निर्माण नियमों, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक अनुमति का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन अक्सर बड़े हादसों के बाद ही सक्रिय होता है, जबकि नियमित जांच से ऐसी स्थितियों को रोका जा सकता है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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