उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार की दोपहर जो कुछ भी हुआ, उसने पूरे शहर को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक आम और शांत दिखने वाली दोपहर अचानक चीख-पुकार, काले धुएं के गुबार और जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में तब्दील हो गई। यहां स्थित एक तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस भयावह हादसे में अब तक 15 मासूम जिंदगियों के खत्म होने की बेहद दर्दनाक खबर सामने आ रही है। इमारत के भीतर फंसे लोगों के पास बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा था। जान बचाने की बेताबी में कई लोग ऊंची मंजिलों से सीधे नीचे कूद गए, तो कुछ ने खिड़कियों से लटके पाइपों के सहारे उतरने का जानलेवा जोखिम उठाया। इस मंजर को जिसने भी देखा, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं।
नियमों को ठेंगा और रसूख का खेल: जांच में हुआ हैरान करने वाला खुलासा
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे के बाद जब राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ, तो उसके साथ ही इस बात की परतें भी खुलने लगीं कि आखिर यह इमारत ‘डेथ ट्रैप’ कैसे बन गई। शुरुआती जांच में जो सच सामने आया है, वह बेहद चौंकाने वाला और सिस्टम को कटघरे में खड़ा करने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, जिस तीन मंजिला इमारत में यह तांडव हुआ, उसका आधिकारिक मानचित्र (नक्शा) तो पास था, लेकिन धरातल पर निर्माण पूरी तरह से उस स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया था। लालच और लापरवाही की हद यह थी कि बिल्डिंग के चारों तरफ छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह यानी ‘सेटबैक एरिया’ को भी पूरी तरह कवर करके अवैध निर्माण कर लिया गया था। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरी इमारत के पास अग्नि सुरक्षा के लिए जरूरी ‘फायर एनओसी’ (No Objection Certificate) तक नहीं थी। यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन और सैकड़ों जिंदगियों के साथ खिलवाड़ था।
धीरेंद्र और सुरेंद्र शुक्ला के नाम पर था नक्शा, एलडीए ने गठित की हाई-लेवल कमेटी
इस पूरे मामले की तफ्तीश में जुटी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की टीम को कई अहम सुराग मिले हैं। कागजी दस्तावेजों की पड़ताल से पता चला है कि इस विवादित और असुरक्षित इमारत का मानचित्र धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला के नाम पर पास कराया गया था। नक्शा पास होने के बाद नियमों को किस तरह ताक पर रखकर यह जानलेवा कंस्ट्रक्शन किया गया, अब इसकी गहराई से जांच की जा रही है। हादसे की गंभीरता और अवैध निर्माण के इस बड़े खुलासे को देखते हुए एलडीए प्रशासन ने आनन-फानन में एक हाई-लेवल जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी न सिर्फ इस अवैध निर्माण की बारीकियों की जांच करेगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि इतने समय से बिना फायर एनओसी और गलत निर्माण के यह बिल्डिंग किसकी शह पर संचालित हो रही थी। अधिकारियों का दावा है कि रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी।
पीड़ित परिवारों में चीत्कार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया मुआवजे का बड़ा ऐलान
इस भीषण और दिल दहला देने वाले हादसे ने कई हंसते-खेलते परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। अपनों को खोने वाले परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ितों के लिए मुआवजे की बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस अग्निकांड में जान गंवाने वाले मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के समुचित इलाज के निर्देश दिए गए हैं और उन्हें 50-50 हजार रुपये की तात्कालिक मदद देने का ऐलान किया गया है। सरकार ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घायलों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए।
