ओमान के डुक्म पोर्ट के पास खड़े एक मालवाहक जहाज पर काम कर रहे भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन की मौत के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। निशांत ‘एमटी सेलेस्टियल’ नाम के जहाज पर पिछले करीब 10 महीनों से कार्यरत थे। उनकी पत्नी साराबिन ने भारत सरकार से पति का शव जल्द से जल्द वापस लाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक अपने पति की मौत को लेकर कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। साराबिन का कहना है कि वह सिर्फ एक बार अपने पति का चेहरा देखना चाहती हैं और जानना चाहती हैं कि आखिर जहाज पर ऐसा क्या हुआ, जिसके कारण उनकी जान चली गई।
दो मासूम बेटियों का भविष्य बना चिंता का कारण
निशांत अपने पीछे पत्नी और दो छोटी बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी तीन साल की है, जबकि छोटी बेटी महज आठ महीने की है। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह निशांत के कंधों पर थी। ऐसे में उनकी अचानक मौत के बाद परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। साराबिन ने सरकार से परिवार के लिए स्थायी रोजगार की मांग करते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह अपनी बेटियों का भविष्य कैसे सुरक्षित करेंगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और संबंधित एजेंसियां मदद नहीं करेंगी तो परिवार के लिए आने वाले दिन बेहद मुश्किल हो सकते हैं।
#WATCH | Thoothukudi, Tamil Nadu | Indian seafarer Nishanth Uirthanathan’s wife Sarabin says, “I am requesting the Government of India to consider my husband’s death… I want to see my husband’s body. I want justice for my husband’s death. Also, I have 8-month baby and a… https://t.co/BiBsuoe0cz pic.twitter.com/Iqu9ZgoLJD
— ANI (@ANI) June 14, 2026
पिता ने कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप
निशांत के पिता ने आरोप लगाया कि शिपिंग कंपनी ने उनके बेटे की मौत की जानकारी समय पर परिवार को नहीं दी। उनका कहना है कि कंपनी की ओर से पहले यह बताया गया कि निशांत की तबीयत खराब है, लेकिन इसके बाद उनका फोन बंद हो गया और किसी ने परिवार से संपर्क नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि जहाज पर मौजूद कर्मचारियों ने निशांत की बिगड़ती हालत को देखते हुए मेडिकल सहायता के लिए हेलीकॉप्टर भेजने की मांग की थी, लेकिन कथित तौर पर कंपनी की ओर से कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं मिली। परिवार का आरोप है कि समय पर उचित इलाज मिलता तो शायद निशांत की जान बचाई जा सकती थी। इसके अलावा, शव को सुरक्षित रखने में भी लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं।
भारतीय दूतावास ने शुरू की प्रक्रिया, जांच की मांग तेज
ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि वह स्थानीय प्रशासन, बंदरगाह अधिकारियों और शिपिंग कंपनी के साथ लगातार संपर्क में है। दूतावास के अनुसार, जहाज के डुक्म पोर्ट पहुंचते ही शव को भारत भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। हालांकि, परिवार का कहना है कि सिर्फ शव वापस लाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि निशांत की मौत किन परिस्थितियों में हुई। अब इस मामले में शिपिंग कंपनी की जवाबदेही और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। परिवार ने केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
Read More-होर्मुज में सिर्फ भारतीय जहाज ही क्यों बन रहे निशाना? नाविकों के वीडियो से उठे गंभीर सवाल
