दिल्ली में शनिवार को जो राजनीतिक हलचल देखने को मिली, उसने पश्चिम बंगाल की सियासत को फिर से गर्म कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मुलाकात केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बातचीत के बाद हुई, जहां पार्टी के अंदरूनी हालात और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। इस दौरान TMC की सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं, जिससे इस मुलाकात को लेकर और भी तरह-तरह की अटकलें लगने लगी हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व मंत्री मानस भुनिया के फैसले से TMC में हलचल तेज
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और झटका लगा जब पूर्व मंत्री मानस भुनिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 74 वर्षीय भुनिया ने साफ कहा कि वह पार्टी के मौजूदा माहौल से खुश नहीं हैं और अंदरूनी हालात उन्हें परेशान कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि आगे वह किस राजनीतिक दिशा में जाएंगे। उनके इस्तीफे ने टीएमसी के भीतर पहले से चल रही चर्चाओं को और हवा दे दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक अकेला इस्तीफा नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष की झलक है, जो आने वाले समय में और भी सामने आ सकता है।
TMC के अंदर आरोप-प्रत्यारोप तेज
TMC के नेता कुणाल घोष ने इस पूरे मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है और पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सुदीप बंद्योपाध्याय पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें हमेशा सम्मान और जिम्मेदारी दी, लेकिन बदले में हालात कुछ और ही सामने आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कई नेता ऐसे हैं जिन्होंने अपने निजी हितों के कारण पार्टी छोड़ दी या अलग राह पकड़ ली। उनके इन बयानों से पार्टी के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक रूप से सामने आती दिख रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
क्या TMC में बड़े बदलाव की शुरुआत?
इन सभी घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक तरफ वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में सक्रियता, तो दूसरी तरफ लगातार हो रहे इस्तीफे पार्टी की स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पार्टी में बड़ा विभाजन होने वाला है, लेकिन इतना जरूर है कि अंदरूनी असंतोष धीरे-धीरे सामने आ रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी इस स्थिति को कैसे संभालती हैं और पार्टी को किस दिशा में ले जाती हैं।
