पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा तूफान आया हुआ है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शीर्ष नेतृत्व की रातों की नींद उड़ा दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें थामे नहीं थम रही हैं और पार्टी के भीतर का बिखराव अब खुलकर सड़कों से लेकर संसद तक दिखाई देने लगा है। दरअसल, टीएमसी के उन 20 बागी सांसदों की सूची सामने आई है, जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को पत्र लिखकर संसद में अलग बैठने की मांग की है। इस चौंकाने वाली लिस्ट में जो सबसे हैरान करने वाला नाम सामने आया है, वह है युवा और तेजतर्रार नेता सयानी घोष का। ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली सयानी के इस कदम को राजनीतिक गलियारों में ‘दीदी’ के लिए एक बहुत बड़ा व्यक्तिगत और रणनीतिक झटका माना जा रहा है, जिसने बंगाल से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
17 साल की उम्र में रखा था ग्लैमर की दुनिया में कदम, ऐसे बनीं स्टार
राजनीति के मंच पर तहलका मचाने वाली सयानी घोष का ग्लैमर और कला की दुनिया से बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है। उन्होंने बेहद कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था। महज 17 साल की उम्र में, जब बच्चे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तब साल 2010 में सयानी ने बंगाली टेलीफिल्म ‘इच्छे दाना’ से अभिनय की दुनिया में अपना पहला कदम रखा था। अपनी बेहतरीन अदाकारी और सुरीली आवाज के दम पर उन्होंने बहुत जल्द बंगाली फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में एक प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका के रूप में अपनी एक खास और अलग पहचान बना ली। कला के क्षेत्र में नाम कमाने के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया, जहाँ ममता बनर्जी ने उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी और वे संसद तक पहुँचने में कामयाब रहीं।
महज 12वीं पास हैं सयानी, जानिए कितनी है इस बागी सांसद की कुल संपत्ति
सयानी घोष की शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने स्कूल स्तर तक ही औपचारिक शिक्षा प्राप्त की है और वह 12वीं पास हैं। लेकिन शिक्षा के पारंपरिक पैमानों से परे जाकर उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर न सिर्फ शोबिज बल्कि राजनीति में भी ऊंचे मुकाम हासिल किए हैं। चुनावी हलफनामों और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस युवा सांसद की कुल नेटवर्थ (संपत्ति) 90 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। उनके पास अपनी कमाई से बनाई गई अचल संपत्ति के साथ-साथ ठीक-ठाक बैंक बैलेंस और आभूषण भी हैं। एक साधारण बैकग्राउंड और सीमित शैक्षणिक योग्यता के बावजूद इतनी कम उम्र में इस मुकाम और संपत्ति तक पहुँचना उनकी निजी कामयाबी को दर्शाता है, जो अब टीएमसी से बगावत के बाद अचानक फिर से चर्चा का विषय बन गई है।
बदलते राजनीतिक समीकरण: क्या ममता संभाल पाएंगी अपना कुनबा?
सयानी घोष समेत 20 सांसदों के इस बागी रुख ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह को पूरी तरह से बेपर्दा कर दिया है। संसद में अलग बैठने की मांग सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व को चुनौती देने जैसी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ममता बनर्जी ने जल्द ही इस डैमेज को कंट्रोल नहीं किया, तो आगामी दिनों में बंगाल की सत्ता पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। सयानी जैसी युवा और उभरती हुई नेता का बागी गुट में शामिल होना यह साफ संकेत देता है कि पार्टी के भीतर असंतोष की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि हमेशा संकटों से उबरने वाली ममता बनर्जी अपने इस बिखरते कुनबे को बचाने के लिए क्या नया दांव खेलती हैं।
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