Basti News: उत्तर प्रदेश के बस्ती रेलवे स्टेशन पर उस समय हड़कंप मच गया जब राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त टीम ने सत्याग्रह एक्सप्रेस के जनरल कोच से भारी मात्रा में चरस बरामद की। बरामद की गई 5.5 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली चरस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 2.75 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह कार्रवाई नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई, जिसने रेलवे नेटवर्क के दुरुपयोग को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
जनरल कोच में छिपा था करोड़ों का नशा, टीम पहुंचते ही भागे तस्कर
सूत्रों के अनुसार, लखनऊ मंडल की स्पेशल टास्क टीम को सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 15273 सत्याग्रह एक्सप्रेस के जरिए नशीले पदार्थों की बड़ी खेप ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर टीम ने बस्ती स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही जनरल कोच में सघन तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान टीम को एक लावारिस बैग मिला, जिससे शक और गहरा गया। जैसे ही बैग खोला गया, उसके अंदर से भारी मात्रा में चरस बरामद हुई। अधिकारियों के अनुसार, जब सुरक्षा टीम ट्रेन में पहुंची, तो तस्कर पहले ही सतर्क हो गए और मौका पाकर बोरी और बैग छोड़कर फरार हो गए।
5.5 किलो चरस की बड़ी बरामदगी
जांच में सामने आया कि यह बैग लखनऊ की ओर से ट्रेन में चढ़ाया गया था। कुछ संदिग्ध लोग इसे लेकर जनरल कोच में बैठे थे, लेकिन बस्ती पहुंचने से पहले ही वे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। टीम को संदेह है कि यह पूरी साजिश संगठित गिरोह द्वारा रची गई थी, जो रेलवे रूट का इस्तेमाल कर नशे की तस्करी करता है। बरामद 5.5 किलोग्राम चरस को जब्त कर लिया गया है और इसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जीआरपी बस्ती को सौंप दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसका अंतिम गंतव्य क्या था।
रेलवे नेटवर्क पर निगरानी बढ़ी, पहले भी पकड़ा गया था गांजा
जीआरपी ने इस मामले में अज्ञात तस्करों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की संयुक्त टीम अब सीसीटीवी फुटेज और यात्रियों की जानकारी के आधार पर तस्करों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी तरह की कार्रवाई में टीम ने 17 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया था, जिसकी कीमत लाखों में आंकी गई थी। लगातार हो रही इन बरामदगियों से साफ है कि रेलवे नेटवर्क का उपयोग नशा तस्करी के लिए किया जा रहा है, जिसे रोकने के लिए अभियान और तेज किया जाएगा।
