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मोनालिसा और फरमान को लेकर ऐसा क्यों बोला हाई कोर्ट? कहा ‘खुद को खुश किस्मत समझो कि…’

मोनालिसा भोसले और मोहम्मद फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की टिप्पणी ने मामला चर्चा में ला दिया। जानिए उम्र विवाद, शादी और कानूनी लड़ाई से जुड़ी पूरी जानकारी।

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प्रयागराज महाकुंभ से चर्चा में आईं मोनालिसा भोसले और उनके पति मोहम्मद फरमान खान से जुड़ा मामला अब कानूनी और सामाजिक बहस का बड़ा विषय बन गया है। दोनों की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एक टिप्पणी ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि दोनों खुद को भाग्यशाली समझें कि वे केरल में हैं। इस टिप्पणी के बाद कोर्ट रूम में मौजूद लोगों का ध्यान इस मामले की गंभीरता की ओर गया। दरअसल, मोनालिसा और फरमान ने अपनी शादी के बाद सुरक्षा और कानूनी परेशानियों का हवाला देते हुए अदालत का रुख किया था। कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर सभी की नजर बनी हुई है।

कुंभ मेले से शुरू हुई पहचान, शादी के बाद बढ़ा विवाद

मोनालिसा भोसले उस समय देशभर में चर्चा का विषय बन गई थीं, जब उनके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे। महाकुंभ के दौरान माला बेचने वाली इस युवती की लोकप्रियता अचानक बढ़ गई थी। बाद में उन्होंने फरमान खान से विवाह कर लिया, जिसके बाद मामला विवादों में घिर गया। शादी को लेकर कई तरह के सवाल उठाए गए। सबसे बड़ा विवाद मोनालिसा की उम्र को लेकर सामने आया। कुछ लोगों और संगठनों ने दावा किया कि विवाह के समय वह बालिग नहीं थीं। वहीं दूसरी ओर, दंपति का कहना है कि शादी पूरी तरह कानूनी और सहमति से हुई है। इसी विवाद के चलते मामला अदालत तक पहुंच गया और अब इसकी कानूनी जांच चल रही है।

उम्र और दस्तावेजों को लेकर दोनों पक्षों में टकराव

सुनवाई के दौरान दंपति की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में कहा कि कुछ लोग और संगठन इस विवाह को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा कर रहे हैं। उनका दावा है कि शादी के समय मोनालिसा बालिग थीं और बाद में सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कर उन्हें नाबालिग दिखाने की कोशिश की गई। दूसरी ओर राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों के अनुसार मोनालिसा की जन्मतिथि ऐसी है, जिससे विवाह के समय उनकी उम्र कानूनी सीमा से कम मानी जा सकती है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मामले में दस्तावेजों की जांच की जा रही है और यदि किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है तो अतिरिक्त कानूनी धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि अब तक युवती ने स्वयं अपने पति के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, जो मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

दो राज्यों में चल रही कानूनी कार्रवाई

यह मामला अब केवल एक विवाह विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। मध्य प्रदेश और केरल, दोनों राज्यों में इससे जुड़ी अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं। कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने विवाह की वैधता पर सवाल उठाए हैं, जबकि दंपति लगातार अपने रिश्ते को वैध और सहमति आधारित बता रहे हैं। इसके अलावा कुछ राजनीतिक और सामाजिक नाम भी इस विवाद में सामने आए हैं, जिनकी भूमिका को लेकर अलग-अलग आरोप लगाए जा रहे हैं। फिलहाल अदालत के अंतिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकता है। वहीं सोशल मीडिया पर भी यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब सभी की नजर अदालत के अगले फैसले पर है, जो इस बहुचर्चित विवाद में कई सवालों के जवाब दे सकता है।

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