देश की राजधानी दिल्ली का मालवीय नगर इलाका उस वक्त दहल उठा, जब यहाँ स्थित ‘लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट और होटल’ में अचानक भीषण आग लग गई। सुबह करीब 9 बजे जब लोग अपनी दिनचर्या की शुरुआत कर रहे थे, तभी होटल के बेसमेंट से धुआं उठने लगा। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि वह पांचवीं मंजिल तक जा पहुँची। इस हादसे के वक्त होटल के अंदर 40 से अधिक लोग मौजूद थे। चारों तरफ मची अफरा-तफरी के बीच स्थानीय लोग और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुँची। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 37 लोगों को बाहर निकाला गया, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ और झुलसने के कारण तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती जांच में इस भयानक त्रासदी की वजह रसोई गैस (LPG) का लीक होना माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए पीड़ितों को हर संभव मदद देने के निर्देश जारी किए हैं।
लाशों के ढेर के बीच खड़े हुए गंभीर सवाल, अपनों को खोने का दर्द
इस दर्दनाक अग्निकांड ने अब तक 21 मासूम जिंदगियों को लील लिया है, जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल है। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धुएं और आग की लपटों के कारण लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। मौके पर पहुँचे आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सोमनाथ भारती ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जान-माल का यह नुकसान दिल दहला देने वाला है। उन्होंने स्थानीय लोगों की तारीफ की जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर 20-25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। सोमनाथ भारती ने कहा कि समाज के सभी वर्ग मदद के लिए आगे आए हैं, लेकिन आग पर काबू पाने में हुई देरी की वजह से नुकसान का दायरा बहुत ज्यादा बढ़ गया।
पीड़ितों पर ही दोष मढ़ रही सरकार”– सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला
इस बीच, हादसे ने एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने इस अग्निकांड के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र और सरकार की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने पिछली घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा, *”फरवरी में पालन की आग में 9 लोग मरे, जांच रिपोर्ट आज तक नहीं आई। विवेक विहार हादसे के वक्त फायर ब्रिगेड के पास पानी नहीं था और अब यहाँ 21 लोग जलकर मर गए।”* भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए ‘टूलकिट’ सक्रिय कर चुकी है। जो मजबूर लोग बाहर से आकर अपने परिजनों के इलाज के लिए इन छोटे होटलों में रह रहे थे, सरकार उल्टा उन्हीं को कसूरवार ठहरा रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार अपनी जिम्मेदारी तय करे और दोषी अफसरों पर ठोस कार्रवाई करे।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी और सिस्टम की लाचारी
मालवीय नगर के इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के व्यावसायिक भवनों, होटलों और रेस्टोरेंटों में फायर सेफ्टी मानकों की पोल खोल कर रख दी है। सघन आबादी वाले क्षेत्रों में चल रहे इन होटलों में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) और आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम न होना आम बात हो गई है। जब तक प्रशासन जागता है, तब तक कई परिवार तबाह हो चुके होते हैं। स्थानीय निवासियों का भी कहना है कि अगर दमकल की गाड़ियां समय पर पहुँच जातीं और संकरी गलियों में पानी का सही इंतजाम होता, तो शायद इतनी बड़ी संख्या में मौतों को रोका जा सकता था। फिलहाल, इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और लोग सिस्टम से जवाब मांग रहे हैं।
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