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कौन-सा बड़ा फैसला ले सकते हैं उमर अब्दुल्ला? गृहमंत्री दौरे से पहले बुलाई हाईलेवल बैठक से बढ़ी हलचल

जम्मू-कश्मीर में गृह मंत्री के दौरे से पहले सीएम उमर अब्दुल्ला ने NC विधायकों की अहम बैठक बुलाई। राज्य का दर्जा और जन कल्याण जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना।

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जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित दौरे से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है। इसी बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सभी विधायकों की अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक 3 जून को मुख्यमंत्री आवास गुपकार में सुबह 10 बजे आयोजित की जाएगी। बैठक को लेकर सरकार या पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत एजेंडा सामने नहीं आया है, जिससे राजनीतिक अटकलें और भी तेज हो गई हैं।

सभी विधायकों और निर्दलीयों को भी मिला आमंत्रण

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में केवल NC विधायकों को ही नहीं बल्कि सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को भी बुलाया गया है। इनमें अकरम चौधरी, डॉ. रामेश्वर सिंह, मुजफ्फर इकबाल खान और प्यारे लाल शर्मा जैसे विधायक शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से सभी को आमंत्रण भेजा है और इसे “सामूहिक महत्व के मुद्दों” और “जन कल्याण से जुड़े विषयों” पर चर्चा के लिए जरूरी बताया गया है। इसी कारण इस बैठक को सामान्य राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि एक रणनीतिक मीटिंग माना जा रहा है।

राज्य का दर्जा और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की संभावना

हालांकि आधिकारिक एजेंडा स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बैठक में जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने, प्रशासनिक कामकाज और जन कल्याण योजनाओं की स्थिति जैसे अहम मुद्दों पर बात हो सकती है। इसके अलावा मंत्रियों के कामकाज और कुछ क्षेत्रों में असंतोष की शिकायतों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ विधायकों ने पहले मुख्यमंत्री से मिलकर एक मंत्री के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके बाद यह बैठक और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

गुटबाजी और असंतोष के बीच मुख्यमंत्री की बड़ी रणनीति

पार्टी के भीतर कुछ क्षेत्रों में असंतोष और विकास कार्यों के असमान वितरण को लेकर विवाद की खबरें भी सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्रों की उपेक्षा और फंड वितरण में भेदभाव के आरोप लगाए हैं। ऐसे में यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी मानी जा रही है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे आने वाले समय में राज्य के मुद्दों पर बड़ा राजनीतिक बयान दे सकते हैं।

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