उत्तर प्रदेश के चर्चित बाहुबलियों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंस के मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले ने पूरे प्रदेश में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। कोर्ट पहले ही राज्य सरकार से उन लोगों की पूरी जानकारी मांग चुका है, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले होने के बावजूद उन्हें हथियारों के लाइसेंस और सुरक्षा दी गई है। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल कर बताया था कि कोर्ट द्वारा मांगी गई 83 लोगों की सूची में से 42 लोगों की जानकारी तैयार कर कोर्ट को दे दी गई है। बाकी 41 लोगों की विस्तृत रिपोर्ट अभी जुटाई जा रही है। सरकार ने कहा था कि इन मामलों की जांच और सत्यापन में समय लग रहा है, इसलिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए। कोर्ट ने उस समय सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा था कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आज की सुनवाई में सरकार को पूरी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ सकती है।
राजा भैया से लेकर कई बाहुबलियों पर नजर
इस मामले में हाईकोर्ट ने जिन लोगों की जानकारी मांगी है, उनमें कई चर्चित नाम शामिल बताए जा रहे हैं। अदालत ने सरकार से बाहुबलियों की क्राइम हिस्ट्री, उनके हथियारों के लाइसेंस और उन्हें मिली सुरक्षा व्यवस्था की पूरी रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि किन आधारों पर ऐसे लोगों को हथियार रखने की अनुमति दी गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गृह विभाग के अधिकारियों को भी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, तो ऐसे मामलों में नियमों का पालन बेहद जरूरी है। कोर्ट ने संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों और कमिश्नरों से लिखित जिम्मेदारी भी मांगी है कि रिपोर्ट में कोई जानकारी छिपाई नहीं गई है। अगर कोई तथ्य छिपाया गया, तो संबंधित अधिकारी खुद जिम्मेदार माने जाएंगे। कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी से रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
सरकार के हलफनामे ने बढ़ाई चिंता
राज्य सरकार द्वारा कोर्ट में दाखिल हलफनामे ने कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश में इस समय 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। इनमें हजारों ऐसे मामले भी शामिल हैं, जहां लाइसेंस धारकों पर आपराधिक केस दर्ज हैं। हलफनामे के मुताबिक 6 हजार से ज्यादा ऐसे लोग हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं, फिर भी उनके पास शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं। इसके अलावा करीब 21 हजार परिवार ऐसे बताए गए हैं, जिनके पास एक से ज्यादा हथियारों के लाइसेंस हैं। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि अभी 23 हजार से ज्यादा नए आवेदन लंबित पड़े हैं। पुलिस और जिला प्रशासन के फैसलों के खिलाफ 1738 अपीलें भी लंबित हैं। इन आंकड़ों को देखकर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई थी। कोर्ट ने कहा कि हथियारों का गलत इस्तेमाल समाज में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है और यह स्थिति चिंता का विषय है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी से बढ़ा दबाव
सुनवाई के दौरान जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने हथियारों के खुले प्रदर्शन और उनके दुरुपयोग को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा कि कई लोग हथियारों को सुरक्षा का प्रतीक बताते हैं, लेकिन जब उनका इस्तेमाल दबाव बनाने और डर फैलाने के लिए होने लगे, तो इससे समाज में भय का माहौल बनता है। अदालत ने साफ कहा कि ऐसा समाज, जहां हथियारों के दम पर प्रभाव बनाया जाए, वह सुरक्षित और शांतिपूर्ण नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सख्त हो। अब सबकी नजर आज होने वाली सुनवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि अदालत इस मामले में सरकार से कड़ा जवाब मांग सकती है और आगे कुछ बड़े निर्देश भी जारी हो सकते हैं। इस पूरे मामले ने प्रदेश में हथियारों के लाइसेंस और बाहुबलियों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
