मध्य प्रदेश के हरदा जिले से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक किसान जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान अचानक टूट जाता है और कलेक्टर के सामने ही जमीन पर गिरकर फूट-फूट कर रोने लगता है। वहां मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और आम लोग यह दृश्य देखकर कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए। मामला खेड़ी महमूदाबाद गांव के किसान माखनलाल शर्मा और शंभूदयाल शर्मा से जुड़ा है, जो अपनी जमीन से संबंधित शिकायत लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे। किसान अपनी परेशानी बताते-बताते इतने भावुक हो गए कि खुद को संभाल नहीं पाए। VIDEO में साफ दिखाई दे रहा है कि किसान बेहद दर्द और तनाव में नजर आ रहा है। इस दौरान हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन भी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने पूरे मामले को गंभीरता से सुना। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है और लोग किसानों की हालत को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं।
“बिना अनुमति खेत में डाल रहे 33 केवी लाइन”, बिजली विभाग पर गंभीर आरोप
पीड़ित किसानों ने बिजली विभाग और संबंधित ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन पर पहले से बिजली के खंभे और लाइन मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद अब नई 33 केवी लाइन निकाली जा रही है। सबसे बड़ा आरोप यह है कि यह काम उनकी अनुमति के बिना किया जा रहा है। किसानों का दावा है कि उन्हें किसी तरह का मुआवजा भी नहीं दिया गया और जब उन्होंने विरोध किया तो उनकी बात नहीं सुनी गई। किसान माखनलाल शर्मा ने कहा कि अधिकारी और ठेकेदार जबरन खेत में काम करवा रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन पर खेती करके उनका परिवार चलता है, उसी जमीन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। जनसुनवाई में पहुंचे किसानों ने प्रशासन से मांग की कि जब तक पूरा मामला साफ नहीं हो जाता, तब तक खेत में हो रहा काम तुरंत रोका जाए।
कोर्ट में चल रहा मामला, फिर भी नहीं रुका काम
किसानों का कहना है कि यह मामला पहले से कोर्ट में चल रहा है और जल्द ही इसकी सुनवाई भी होने वाली है। इसके बावजूद विभाग की ओर से जमीन पर काम जारी रखा गया है। किसानों ने इसे नियमों की अनदेखी बताया है। उनका कहना है कि अगर मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो फिर प्रशासन और विभाग को काम रोकना चाहिए था। किसान शंभूदयाल शर्मा ने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों को जानकारी देने के बावजूद उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। यही वजह रही कि जनसुनवाई में पहुंचकर उनका दर्द छलक पड़ा। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसानों की जमीन और खेती से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता जरूरी है, लेकिन यहां किसान खुद को अकेला और परेशान महसूस कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद अब लोग सोशल Media पर भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसानों की शिकायतों का समय रहते समाधान क्यों नहीं हो रहा।
बीमारी, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव ने तोड़ दिया किसान
माखनलाल शर्मा ने जनसुनवाई के दौरान बताया कि उनका परिवार पहले से ही गंभीर परेशानियों से गुजर रहा है। परिवार का एक सदस्य कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, जिसके इलाज में काफी पैसा खर्च हो रहा है। ऐसे में जमीन को लेकर चल रहा विवाद और अधिकारियों की कथित कार्रवाई ने उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया है। किसान ने कहा कि लगातार तनाव और दबाव के कारण उनका परिवार डर और चिंता में जी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग की ओर से उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति खराब हो गई है। जनसुनवाई में किसान के रोने और जमीन पर गिरने का वीडियो सामने आने के बाद लोगों की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कई लोगों ने इसे किसानों की पीड़ा का असली चेहरा बताया है। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर किसानों की समस्याओं और उनकी मानसिक स्थिति को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।
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