मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। 12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी, लेकिन इस घटना के बाद से परिवार ने इसे सामान्य आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया है। ट्विशा के मायके पक्ष ने ससुरालवालों पर दहेज उत्पीड़न और हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इसी वजह से परिवार अब तक ट्विशा का अंतिम संस्कार नहीं कर पाया है। मौत के नौ दिन बाद भी ट्विशा का शव भोपाल एम्स की मोर्चरी में रखा हुआ है, जिसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब इस मामले में पुलिस की ओर से परिवार को लिखी गई एक चिट्ठी चर्चा का केंद्र बन गई है। पुलिस ने परिवार से अपील की है कि शव को जल्द मोर्चरी से ले जाया जाए, क्योंकि लंबे समय तक रखने की वजह से उसके खराब होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इस पूरे मामले ने भोपाल ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है।
एम्स की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने परिवार को लिखा पत्र
भोपाल एम्स की तरफ से 18 मई की रात पुलिस को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें साफ तौर पर कहा गया कि ट्विशा शर्मा के शव को सुरक्षित रखने के लिए बेहद कम तापमान यानी माइनस 80 डिग्री सेल्सियस जैसी विशेष सुविधा की जरूरत है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उनकी मोर्चरी में इतनी उन्नत सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में शव के धीरे-धीरे डीकंपोज होने की संभावना लगातार बढ़ रही है। इसके बाद पुलिस ने यह जानकारी ट्विशा के परिवार तक पहुंचाई और उनसे शव को ले जाने की अपील की। पुलिस की चिट्ठी में यह भी कहा गया कि यदि परिवार दोबारा पोस्टमार्टम कराना चाहता है तो पुलिस को उस पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन शव को ज्यादा समय तक मोर्चरी में रखना स्थिति को और जटिल बना सकता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे मामले की जांच पूरी गंभीरता से कर रहे हैं, लेकिन शव की स्थिति को देखते हुए परिवार को जल्द फैसला लेना चाहिए। इस पत्र के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कई लोग परिवार के दर्द को समझने की बात कर रहे हैं, तो कुछ लोग कानून प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग उठा रहे हैं।
परिवार को री-पोस्टमार्टम की उम्मीद
ट्विशा शर्मा का परिवार लगातार री-पोस्टमार्टम यानी दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहा है। परिवार का आरोप है कि शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है और उन्हें न्याय पाने के लिए निष्पक्ष जांच की जरूरत है। इसी वजह से परिवार अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं है। मामले को लेकर भोपाल पुलिस आयुक्त ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति देना पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यह फैसला केवल अदालत ही ले सकती है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि यदि अदालत अनुमति देती है तो प्रशासन री-पोस्टमार्टम कराने में पूरा सहयोग करेगा। परिवार फिलहाल कानूनी सलाह लेकर आगे की रणनीति तय कर रहा है। दूसरी तरफ ट्विशा के रिश्तेदारों और परिचितों का कहना है कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक परिवार अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रखेगा। इस पूरे मामले ने महिलाओं की सुरक्षा, दहेज उत्पीड़न और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
ट्विशा शर्मा केस ने खड़े किए कई बड़े सवाल
ट्विशा शर्मा की मौत अब केवल एक आत्महत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह संवेदनशील सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन चुका है। नौ दिन तक शव का मोर्चरी में रखा रहना अपने आप में असामान्य स्थिति मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक शव सुरक्षित रखना मेडिकल और कानूनी दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। वहीं परिवार का दर्द और न्याय की मांग भी लोगों को भावुक कर रही है। पुलिस और प्रशासन लगातार परिवार से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब सबकी नजर अदालत के अगले कदम पर टिकी है। यदि अदालत री-पोस्टमार्टम की अनुमति देती है, तो मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। दूसरी ओर अगर परिवार जल्द अंतिम संस्कार नहीं करता, तो शव की स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल भोपाल का यह मामला प्रदेश की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो चुका है और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर ट्विशा शर्मा की मौत के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है।
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