पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में कई बड़े और असरदार फैसले लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा चर्चा महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली योजना की हो रही है। सरकार ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी देते हुए ऐलान किया है कि राज्य की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने 3000 रुपये भेजे जाएंगे। यह योजना 1 जून से लागू की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे लाखों महिलाओं को सीधा फायदा मिलेगा और घरेलू आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इस फैसले को आगामी समय में राज्य की राजनीति के लिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि महिलाओं को साधने की कोशिश हर दल की प्राथमिकता बनी हुई है।
महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त सफर, जनता को राहत देने की तैयारी
कैबिनेट बैठक में महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा को भी मंजूरी दी गई है। सरकार के अनुसार, 1 जून से राज्य परिवहन की बसों में महिलाएं बिना किराया दिए सफर कर सकेंगी। माना जा रहा है कि इस फैसले से नौकरीपेशा महिलाओं, छात्राओं और रोजाना सफर करने वाली लाखों महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। बढ़ती महंगाई के बीच यह कदम आम लोगों को राहत देने वाला माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। विपक्ष हालांकि इसे चुनावी रणनीति बता रहा है, लेकिन सरकार इसे सामाजिक कल्याण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। परिवहन विभाग को इस योजना को लागू करने के लिए जरूरी तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी कर्मचारियों को खुशखबरी, बनेगा 7वां राज्य वेतन आयोग
राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े कर्मियों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने 7वें राज्य वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों, संबद्ध वैधानिक निकायों और शैक्षणिक संस्थानों के वेतन ढांचे की समीक्षा की जाएगी। लंबे समय से कर्मचारी संगठन नए वेतन आयोग की मांग कर रहे थे। सरकार के इस फैसले के बाद कर्मचारियों में उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए यह कदम जरूरी था। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य के लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा।
धार्मिक आधार पर सहायता बंद, फैसलों के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे
कैबिनेट बैठक में एक और अहम फैसला लिया गया, जिसके तहत धार्मिक वर्गीकरण के आधार पर दी जाने वाली सरकारी सहायता को बंद करने का निर्णय किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि अब योजनाओं और आर्थिक सहायता में धार्मिक आधार को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समर्थक इसे समानता की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इसे राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर देख रहे हैं। कुल मिलाकर शुभेंदु अधिकारी सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक कई बड़े संदेश देकर गई है। महिलाओं, कर्मचारियों और आम जनता को राहत देने वाले फैसलों के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर राज्य की राजनीति और जनता दोनों पर दिखाई दे सकता है।
Read more-प्रेमानंद महाराज की अचानक बिगड़ी तबीयत! आश्रम ने किया बड़ा ऐलान
