मौलाना मदनी (Maulana Arshad Madani) ने जमीयत उलमा-ए-हिंद की दो दिवसीय कार्यसमिति बैठक में देश के मौजूदा हालात को लेकर केंद्र और कई राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में अब नफरत की राजनीति से आगे बढ़कर डर और धमकी की राजनीति की जा रही है। उनका आरोप था कि मुसलमानों को यह महसूस कराने की कोशिश हो रही है कि उन्हें अब शर्तों के साथ जीना होगा। मदनी ने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए कुछ ताकतें देश की एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में चुनावों के दौरान खुलेआम धार्मिक बयानबाजी हुई और मुसलमानों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव संविधान की भावना के खिलाफ है और यह देश के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता।
बंगाल, वंदे मातरम् और मदरसों के मुद्दे पर उठाए सवाल
मौलाना मदनी ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल की राजनीति और कथित बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री संविधान की शपथ लेकर पद संभालता है और उसे सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक बयान समाज में धार्मिक विभाजन पैदा करने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने वंदे मातरम् को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी क्योंकि यह उनके धार्मिक विश्वासों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जगह मस्जिदों, मकबरों और मदरसों को अवैध बताकर कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार मदरसों के खिलाफ लगातार नए आदेश जारी किए जा रहे हैं, जिससे मुस्लिम समाज में चिंता का माहौल है। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को शक की नजर से देखना सही नहीं है।
SIR और NRC को लेकर जताई चिंता
जमीयत प्रमुख ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह केवल मतदाता सूची सुधारने की प्रक्रिया नहीं बल्कि NRC जैसे कदम की तरह इस्तेमाल की जा रही है। मदनी ने दावा किया कि कई राज्यों में मुसलमानों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है और बड़ी संख्या में लोगों को संदिग्ध मतदाता घोषित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपने सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने चाहिए ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम वोट को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि पहले सांप्रदायिक दंगों में केवल मुसलमान निशाने पर होते थे, लेकिन अब इस्लाम को ही निशाना बनाया जा रहा है। मदनी ने कहा कि साल 2014 के बाद बने कई कानूनों और फैसलों से मुस्लिम समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। हालांकि उन्होंने लोगों से धैर्य और कानूनी रास्ते अपनाने की अपील भी की।
‘कयामत तक जिंदा रहेगा इस्लाम’, देशभक्ति पर भी दिया संदेश
अपने भाषण के दौरान मौलाना मदनी ने कहा कि इस्लाम को खत्म करने की कोशिशें पहले भी कई देशों में हुईं, लेकिन हर बार इस्लाम कायम रहा। उन्होंने पूर्व सोवियत रूस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लंबे समय तक धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाई गई, लेकिन बाद में वही व्यवस्था टूट गई और कई मुस्लिम देश अस्तित्व में आए। मदनी ने कहा कि इस्लाम एक आसमानी धर्म है और उसे मिटाने वाले खुद खत्म हो गए, जबकि इस्लाम आज भी कायम है और कयामत तक रहेगा। उन्होंने भारतीय मुसलमानों को देशभक्त बताते हुए कहा कि उन्होंने हर कठिन समय में देश के साथ खड़े होकर अपनी निष्ठा साबित की है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को मिले अधिकार किसी सरकार की देन नहीं बल्कि संविधान की ताकत हैं। अंत में उन्होंने देश की सभी न्यायप्रिय और लोकतांत्रिक ताकतों से अपील की कि वे नफरत और कट्टरता के खिलाफ मिलकर काम करें और देश में भाईचारे तथा सामाजिक सौहार्द को मजबूत करें।
