केंद्रीय मंत्री Giriraj Singh के एक बयान ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी नेता ने AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिस पर अब तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। गिरिराज सिंह ने कहा कि “आज नहीं तो कल ओवैसी भी मानेंगे कि वे हिंदू हैं।” उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने इसे धार्मिक पहचान से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताते हुए सवाल उठाए कि देश के सामने बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और उद्योग जैसे गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी लगातार धार्मिक विषयों के इर्द-गिर्द घूम रही है। विपक्षी दलों और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस बयान पर आपत्ति जताई और इसे अनावश्यक विवाद पैदा करने वाला बयान बताया।
ओवैसी ने सीधे जवाब से बचते हुए उठाए उद्योग के मुद्दे
गिरिराज सिंह के बयान पर असदुद्दीन ओवैसी ने सीधे तौर पर तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उन्होंने अपने जवाब में कपड़ा उद्योग और छोटे कारोबारियों की परेशानियों को सामने रखा। ओवैसी ने कहा कि देश के टेक्सटाइल सेक्टर की हालत लगातार खराब होती जा रही है और सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने खासतौर पर वाराणसी, सूरत, मालेगांव और मुबारकपुर जैसे बड़े टेक्सटाइल केंद्रों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां हजारों छोटे व्यापारी और मजदूर संकट का सामना कर रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि सूती धागे यानी कॉटन यार्न की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि तैयार कपड़ों की कीमतें बाजार में स्थिर बनी हुई हैं। इसका सीधा असर पावरलूम उद्योग पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई छोटे कारोबारी आर्थिक दबाव के कारण अपना काम बंद करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं और बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां खतरे में हैं।
टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर केंद्र सरकार से की बड़ी मांग
AIMIM प्रमुख ने केंद्र सरकार से कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए कई कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कॉटन यार्न के एक्सपोर्ट पर अस्थायी रोक लगाई जानी चाहिए ताकि घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़े और कीमतों पर नियंत्रण हो सके। इसके साथ ही उन्होंने कच्चे कॉटन पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की भी मांग की। ओवैसी ने कहा कि रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल उद्योग को निर्यात प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए ताकि छोटे उद्योगों को राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि चीन से आने वाले सस्ते उत्पाद भारतीय बाजार को प्रभावित कर रहे हैं, इसलिए सरकार को एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने पर विचार करना चाहिए। ओवैसी ने अपने बयान में गिरिराज सिंह को याद दिलाया कि मंत्री पद की शपथ लेते समय संविधान और निष्पक्षता की बात कही जाती है। उन्होंने “शुद्ध अंतःकरण” शब्द का जिक्र करते हुए इशारों में बीजेपी नेता पर निशाना साधा।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, लोगों ने उठाए कई सवाल
इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कुछ लोग गिरिराज सिंह के बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स इसे गैरजरूरी और भड़काऊ बयान बता रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि नेताओं को धार्मिक पहचान पर टिप्पणी करने के बजाय देश के असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने ओवैसी की प्रतिक्रिया को राजनीतिक रूप से संतुलित बताया क्योंकि उन्होंने सीधे धार्मिक विवाद में पड़ने के बजाय उद्योग और रोजगार के मुद्दे उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि धार्मिक और राजनीतिक बयान अक्सर चुनावी माहौल में बड़ा मुद्दा बन जाते हैं। फिलहाल दोनों नेताओं के बयान चर्चा का विषय बने हुए हैं और देशभर में इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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