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19 मिनट 34 सेकंड का वो वायरल वीडियो… क्लिक करते ही हैक हो सकता है आपका फोन!

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इंटरनेट पर किसी भी विवादित वीडियो के वायरल होते ही साइबर अपराधी सक्रिय हो जाते हैं और इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर चर्चित “19 मिनट 34 सेकंड” वाले कथित वीडियो को लेकर लगातार सर्च बढ़ रही है। इसी का फायदा उठाकर पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े कई संदिग्ध साइबर नेटवर्क लोगों को निशाना बना रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और फर्जी वेबसाइट्स पर “पूरा वीडियो देखें”, “सीजन 2 डाउनलोड करें” या “लीक्ड क्लिप यहां उपलब्ध” जैसे आकर्षक संदेशों के साथ लिंक शेयर किए जा रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार इन लिंक्स पर क्लिक करते ही मोबाइल या लैपटॉप में खतरनाक मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है, जो यूजर की निजी जानकारी चुराने का काम करता है। कई मामलों में लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने, बैंकिंग ऐप्स का एक्सेस लीक होने और फोन की निजी फाइलें चोरी होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यही वजह है कि साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को ऐसे कंटेंट से दूर रहने की सलाह दे रही हैं।

 “पूरा वीडियो” के नाम पर फैलाया जा रहा फर्जी जाल**

जांच में यह सामने आया है कि अधिकतर वायरल लिंक पूरी तरह फर्जी हैं। इनमें से कई वेबसाइट्स देखने में बिल्कुल असली प्लेटफॉर्म जैसी लगती हैं, ताकि यूजर आसानी से धोखा खा जाए। जैसे ही व्यक्ति लिंक खोलता है, उसे “वीडियो चलाने के लिए ऐप डाउनलोड करें” या “मानव सत्यापन पूरा करें” जैसे मैसेज दिखाई देते हैं। इसके बाद यूजर के फोन में स्पाइवेयर या ट्रोजन वायरस घुस जाता है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तकनीक अब तेजी से बढ़ रही है और अपराधी लोगों की जिज्ञासा का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसा रहे हैं। कई यूजर्स को फर्जी OTP पेज पर भी भेजा जा रहा है, जहां बैंक डिटेल या मोबाइल नंबर डालते ही डेटा चोरी हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ऐसे लिंक व्हाट्सऐप ग्रुप्स और सोशल मीडिया स्टोरीज के जरिए तेजी से फैलते हैं, जिससे युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें और केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें।

आत्महत्या की अफवाह निकली झूठी, सोशल मीडिया पर फैलाई गई सनसनी

वायरल वीडियो विवाद के बाद सोशल मीडिया पर यह अफवाह भी तेजी से फैलने लगी कि कथित रूप से जुड़े लोगों में से एक ने बदनामी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली है। हालांकि, जांच और उपलब्ध तथ्यों में इस दावे की कोई पुष्टि नहीं मिली है। साइबर मॉनिटरिंग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह खबर पूरी तरह झूठी और भ्रामक पाई गई। इंटरनेट पर इस तरह की अफवाहें अक्सर लोगों की भावनाओं को भड़काने और ट्रैफिक बढ़ाने के लिए फैलाई जाती हैं। कई फर्जी यूट्यूब चैनल और पेज इसी तरह के सनसनीखेज थंबनेल बनाकर लाखों व्यूज बटोरने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दौर में बिना पुष्टि के किसी भी खबर को शेयर करना खतरनाक साबित हो सकता है। इससे न केवल संबंधित लोगों की छवि प्रभावित होती है, बल्कि साइबर अपराधियों को भी फर्जी कंटेंट फैलाने का मौका मिल जाता है। यही कारण है कि अब साइबर सेल सोशल मीडिया पर फैल रहे ऐसे कंटेंट की निगरानी बढ़ा रही है।

भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को साफ चेतावनी दी है कि किसी भी वायरल वीडियो, “लीक्ड क्लिप” या “सीक्रेट लिंक” के लालच में आकर अनजान वेबसाइट्स पर विजिट न करें। फोन में हमेशा अपडेटेड एंटीवायरस रखें और बैंकिंग ऐप्स के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें। अगर कोई लिंक संदिग्ध लगे तो तुरंत उसे बंद कर दें और किसी भी स्थिति में अपनी निजी जानकारी साझा न करें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हैकर्स अब केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई बार फोन का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते हैं। इससे कैमरा, माइक्रोफोन और निजी फोटो तक खतरे में पड़ सकते हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते ऐसे विवादित कंटेंट के पीछे अक्सर संगठित साइबर गैंग काम करते हैं, जिनका मकसद केवल लोगों की जिज्ञासा का फायदा उठाकर आर्थिक और डिजिटल नुकसान पहुंचाना होता है। इसलिए जरूरी है कि इंटरनेट इस्तेमाल करते समय सतर्क रहें और किसी भी वायरल ट्रेंड को आंख बंद करके फॉलो करने से बचें।

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