West Bengal CM: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। BJP ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटें जीत लीं और दो-तिहाई बहुमत के साथ पहली बार राज्य में सरकार बनाने जा रही है। वहीं TMC 80 सीटों तक सिमट गई। इस ऐतिहासिक जनादेश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। शुक्रवार को कोलकाता में भाजपा विधायक दल की अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें पर्यवेक्षक के तौर पर Amit Shah भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
पार्टी की रणनीति—स्थानीय चेहरा और मजबूत पकड़
भाजपा ने चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिया था कि मुख्यमंत्री बंगाल से ही होगा। पार्टी अब ऐसे नेता को आगे बढ़ाना चाहती है जिसकी जमीनी पकड़ मजबूत हो, संगठन में प्रभाव हो और जो राज्य की राजनीति को अच्छी तरह समझता हो। यही वजह है कि मुख्यमंत्री पद की रेस में कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। पार्टी के भीतर मंथन जारी है और अंतिम फैसला संगठन की रणनीति, अनुभव और जनस्वीकृति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार ऐसा चेहरा चुनेगी जो लंबे समय तक राज्य में पार्टी को मजबूत बना सके।
रेस में आगे ये बड़े चेहरे
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे Suvendu Adhikari का नाम माना जा रहा है। उन्होंने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है और चुनाव में Mamata Banerjee को कड़ी चुनौती देने के साथ उन्हें हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। इसके अलावा Dilip Ghosh का नाम भी चर्चा में है, जो भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। इनके अलावा कुछ अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, जिनमें केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े चेहरे और अनुभवी नेता शामिल हैं। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान और विधायक दल की बैठक के बाद ही सामने आएगा।
बैठक पर टिकी नजरें
कोलकाता में होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक में सभी नवनिर्वाचित विधायक शामिल होंगे और पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी फैसले को निर्णायक बना सकती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा संभव है। बंगाल की राजनीति में यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार भाजपा इतनी बड़ी ताकत के साथ सत्ता में आ रही है। अब देखना होगा कि पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है और कौन नेता राज्य की कमान संभालकर नई सरकार का नेतृत्व करता है।
