उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध जागेश्वर धाम एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। 19 अप्रैल को हुई एक घटना ने मंदिर की मर्यादा और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे थे। इसी दौरान उनका गनर भी उनके साथ गर्भगृह में प्रवेश कर गया। खास बात यह रही कि गनर के पास कार्बाइन जैसा हथियार मौजूद था, जिसे देखकर वहां मौजूद पुजारियों ने तुरंत आपत्ति जताई। पुजारियों का कहना है कि गर्भगृह में किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना सख्त मना है, और यह परंपराओं का उल्लंघन है।
‘VIP भी मानते हैं नियम’, फिर यहां क्यों हुई चूक?
मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि पहले भी कई बड़े नेता और वीआईपी, जैसे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री, यहां दर्शन के लिए आ चुके हैं, लेकिन किसी ने भी गर्भगृह की मर्यादा नहीं तोड़ी। ऐसे में एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी के साथ इस तरह की घटना होना हैरानी की बात है। स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि चाहे कोई भी व्यक्ति हो, मंदिर के नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में लोगों के बीच नाराजगी और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
ASI और प्रशासन हरकत में, जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया है। एएसआई अधिकारियों ने मंदिर परिसर में नियमों को और स्पष्ट करने के लिए फ्लेक्स बोर्ड लगाने का निर्णय लिया है, जिनमें यह साफ लिखा जाएगा कि गर्भगृह में हथियार ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही, अधिकारियों ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। देहरादून तक पहुंची इस खबर के बाद उच्च स्तर पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
DM की सफाई: ‘अनजाने में हुई गलती’
विवाद बढ़ने के बाद बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने अपनी सफाई भी पेश की है। उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान उन्हें पानी की जरूरत थी, जिसके लिए उन्होंने अपने गनर को बुलाया था। संभवतः इसी दौरान गनर भूलवश हथियार के साथ गर्भगृह में प्रवेश कर गया। उन्होंने यह भी कहा कि वे मंदिर की परंपराओं का पूरा सम्मान करते हैं और जो कुछ हुआ, वह जानबूझकर नहीं किया गया। हालांकि, इस सफाई के बावजूद लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई है और अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर टिकी हुई है।
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