महिला आरक्षण को लेकर देशभर में चल रही राजनीतिक बहस के बीच बीजेपी नेता अपर्णा यादव का एक विरोध प्रदर्शन अचानक बड़े विवाद में बदल गया। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का झंडा जलाकर अपना विरोध जताया, जिसकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं। इस घटना के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है और विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।
विपक्ष का हमला: ‘छोटी मानसिकता’ और FIR की मांग
समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह का कृत्य किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उनके अनुसार, महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली पार्टी को इस तरह की हरकतों से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के मुद्दे के पीछे सत्तारूढ़ दल की मंशा कुछ और हो सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल का झंडा जलाना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि यह नफरत फैलाने वाला कदम है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस का रिएक्शन: ‘हद पार कर दी गई’
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी इस मामले को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई कोई नई नहीं है और इसे लेकर कांग्रेस पहले से आवाज उठाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विशेष सत्र के जरिए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। अजय राय ने झंडा जलाने की घटना को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि विरोध की भी एक मर्यादा होती है, जिसे इस मामले में पूरी तरह तोड़ दिया गया है।
अखिलेश यादव का संकेत: ‘रंग और भावनाएं जुड़ी होती हैं’
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद पर बिना नाम लिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी रंग का अपना सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व होता है। उन्होंने लाल रंग का उदाहरण देते हुए बताया कि यह क्रांति, आस्था और परंपरा से जुड़ा है। ऐसे में किसी भी प्रतीक को नुकसान पहुंचाना लोगों की भावनाओं को आहत कर सकता है। उनके इस बयान को अपर्णा यादव के विरोध प्रदर्शन पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
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