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वंदे मातरम पर इंदौर नगर निगम में हंगामा! कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख बोली- इस्लाम हमें इसकी इजाजत नहीं देता…

इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम पर विवाद, कांग्रेस पार्षद के इनकार से सदन में हंगामा। जानिए पूरा मामला और नेताओं की प्रतिक्रिया।

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इंदौर नगर निगम की बजट बैठक उस वक्त विवादों में घिर गई, जब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख ने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया। जैसे ही यह मुद्दा उठा, सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया और भाजपा व कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते स्थिति इतनी बिगड़ गई कि हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। विरोध इतना तेज था कि सभापति को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा और फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के निर्देश देने पड़े। इस घटना ने स्थानीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

पार्षद का तर्क: “जबरदस्ती नहीं हो सकती”

विवाद के बीच फौजिया शेख ने अपने फैसले का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और ऐसा कोई कानूनी नियम भी नहीं है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। पार्षद के अनुसार, उनके धार्मिक विश्वास उन्हें यह गीत गाने की अनुमति नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि देशभक्ति को किसी एक गीत से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और किसी को भी अपनी भावना के खिलाफ जाने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।

सदन में हंगामा, तीखे शब्दों का इस्तेमाल

इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि सदन में नारेबाजी और तीखे शब्दों का इस्तेमाल होने लगा। कुछ पार्षदों ने विरोध जताते हुए कड़े शब्दों का प्रयोग किया, जिससे माहौल और ज्यादा गर्म हो गया। स्थिति यह हो गई कि कुछ पार्षद सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए और विरोध करने लगे। इससे पहले भी बजट सत्र के दौरान अन्य मुद्दों पर विवाद हो चुका था, लेकिन इस घटना ने पूरे सत्र को सुर्खियों में ला दिया। राजनीतिक माहौल में अचानक आई इस गर्मी ने प्रशासन के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है।

महापौर और विपक्ष की प्रतिक्रिया

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि वंदे मातरम देश के सम्मान से जुड़ा विषय है और इस तरह का व्यवहार सदन में स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इसे व्यक्तिगत मत बताया, लेकिन साथ ही कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी स्तर पर चर्चा की जाएगी। इस पूरे विवाद ने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है कि क्या व्यक्तिगत आस्था और राष्ट्रीय प्रतीकों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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