मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद कर रही दुनिया को उस वक्त करारा झटका लगा, जब ईरान ने अचानक सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बंद करने का एलान कर दिया। हैरानी की बात यह है कि यह कदम उस समय उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा हो चुकी थी। बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को जब ग्रीस के जहाज ‘NJ Earth’ और लाइबेरिया के ‘Daytona Beach’ ने इस जलडमरूमध्य को पार किया, तो लगा कि व्यापारिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट आएंगी। लेकिन यह राहत महज कुछ घंटों की साबित हुई। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, लेबनान पर इजरायल के ताजा और भीषण हमलों ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं, जिसके बाद तेहरान ने इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह सील करने का कड़ा फैसला लिया है।
इजरायली हमले ने भड़काई आग
इस नए तनाव की मुख्य जड़ लेबनान में हुआ वह हमला है, जिसमें 254 लोगों की जान चली गई। इजरायल के इस कदम को ईरान ने सीजफायर का उल्लंघन और उकसावे की कार्रवाई माना है। ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी ‘फार्स’ के मुताबिक, तेहरान ने सुरक्षा का हवाला देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले सभी तेल टैंकरों की आवाजाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी जहाज को बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जो टैंकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की ओर बढ़ रहे थे, उन्हें बीच रास्ते से वापस फारस की खाड़ी की ओर मुड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
समुद्र में फंसी दुनिया
शिपिंग एनालिटिक्स फर्म ‘Kpler’ की रिपोर्ट डराने वाली है। ईरान के इस फैसले के बाद समुद्र में जहाजों का विशाल जाम लग गया है। आंकड़ों के अनुसार, इस समय क्षेत्र में 1,000 से अधिक जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें 187 ऐसे टैंकर हैं जो कच्चे तेल से लबालब भरे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आज रास्ता खुल भी जाए, तो इस भारी ट्रैफिक को निकालने में कम से कम दो हफ्ते का समय लगेगा। ईरान ने अब जहाजों के लिए एक नया ‘नेविगेशन चार्ट’ भी जारी किया है। इसमें जहाजों को चेतावनी दी गई है कि वे केवल तय किए गए रास्तों पर ही चलें, क्योंकि समुद्र में बारूदी सुरंगों (Sea Mines) का खतरा बढ़ गया है। यह सुरक्षा निर्देश असल में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने की ईरान की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आसमान छू सकती हैं कीमतें
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की ‘ऑयल लाइफलाइन’ कहा जाता है, क्योंकि वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इसे बंद किए जाने का मतलब है कि आने वाले दिनों में दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत हो सकती है और कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। यह केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि एक वैश्विक ऊर्जा संकट में बदल चुका है। अगर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय शक्तियां जल्द ही ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस रास्ते को नहीं खुलवाती हैं, तो वैश्विक शेयर बाजारों से लेकर आम आदमी की जेब तक, इस ‘बवाल’ का असर हर जगह देखने को मिलेगा। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह सीजफायर पूरी तरह टूट जाएगा या शांति का कोई नया रास्ता निकलेगा।
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