अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच घोषित हुए सीजफायर पर भारत सरकार की पहली प्रतिक्रिया सामने आ गई है। विदेश मंत्रालय ने इस समझौते का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता स्थापित होगी। मंत्रालय ने कहा कि भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही होना चाहिए।
सरकार ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति बहाल होना न केवल संबंधित देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। भारत ने यह भी दोहराया कि वह शुरू से ही तनाव कम करने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की वकालत करता आया है।
युद्ध के असर पर भारत की चिंता
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में हाल के संघर्ष के कारण हुए नुकसान पर भी चिंता जताई। एक महीने से अधिक समय तक चले इस तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा। खासकर तेल आपूर्ति से जुड़े मार्गों पर अनिश्चितता के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।
भारत ने कहा कि अब सीजफायर के बाद उम्मीद है कि होरमूज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार फिर से सामान्य होगा। यह क्षेत्र दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में स्थिरता बहाल होना पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर है।
भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी
सीजफायर के बावजूद भारत सरकार ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों के लिए सख्त सुरक्षा सलाह जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि नागरिक जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से देश छोड़ने की योजना बनाएं। इसके लिए दूतावास द्वारा बताए गए मार्गों का ही उपयोग करने की सलाह दी गई है।
एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बिना दूतावास से संपर्क किए किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बढ़ना खतरनाक हो सकता है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे दूतावास के साथ लगातार संपर्क में रहें और किसी भी आपात स्थिति में दिए गए हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें।
आगे क्या, भारत की रणनीति
भले ही सीजफायर लागू हो गया हो, लेकिन क्षेत्र में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ऐसे में भारत का यह कदम एहतियात के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और स्थिरता का समर्थक है। आने वाले दिनों में यदि स्थिति में सुधार होता है, तो क्षेत्र में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह पटरी पर लौट सकती है। फिलहाल सरकार और दूतावास दोनों ही नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं।
