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जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा भारतीय झंडे वाला LPG टैंकर, मुंबई कब पहुंचेगा ‘ग्रीन सान्वी’?

ग्रीन सान्वी एलपीजी टैंकर ने होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत को बड़ी राहत दी। जानिए कब तक पहुंचेगा मुंबई और कैसे प्रभावित होगी देश की गैस सप्लाई।

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भारत के लिए ऊर्जा सप्लाई के मोर्चे पर एक राहत देने वाली खबर सामने आई है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ग्रीन सान्वी सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुका है और अब मुंबई की ओर बढ़ रहा है। जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक, यह टैंकर 6 अप्रैल तक मुंबई पहुंच सकता है। इस जहाज पर करीब 44,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है, जो मौजूदा हालात में देश की जरूरतों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है, ऐसे में इस टैंकर का सुरक्षित निकलना बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

होर्मुज पार करने वाला सातवां भारतीय जहाज

रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रीन सान्वी इस संकट के दौरान होर्मुज स्ट्रेट पार करने वाला सातवां भारतीय जहाज बन गया है। खास बात यह है कि अब तक पार करने वाले सभी जहाज एलपीजी टैंकर ही रहे हैं, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी हैं। फारस की खाड़ी के पूर्वी हिस्से में अभी भी 17 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं, जो आगे बढ़ने के लिए क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं। भारत सरकार लगातार ईरान के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रही है ताकि इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके और सप्लाई चेन बाधित न हो।

ईरान की शर्तें और भारत को मिली राहत

मौजूदा हालात में Iran ने होर्मुज स्ट्रेट पर कड़ा नियंत्रण लागू किया है और कुछ देशों के जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जा रही है। ईरान के अनुसार, केवल मित्र देशों—जैसे भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान—को ही तालमेल के बाद इस रास्ते से गुजरने दिया जा रहा है। भारतीय जहाजों को विशेष छूट मिलने की वजह दोनों देशों के मजबूत संबंध हैं। ग्रीन सान्वी ने भी इसी प्रक्रिया का पालन करते हुए भारतीय पहचान और चालक दल की जानकारी साझा की, जिसके बाद उसे सुरक्षित मार्ग मिला।

आगे क्या—और टैंकर रास्ते में

आने वाले दिनों में दो और एलपीजी टैंकर—ग्रीन आशा और जग विक्रम—भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच सकते हैं। इससे देश में एलपीजी की सप्लाई को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी। हाल ही में जग वसंत और पाइन गैस जैसे टैंकर भी भारत पहुंच चुके हैं और उन्होंने बड़ी मात्रा में एलपीजी डिलीवर की है। मौजूदा तनाव के चलते सप्लाई पर असर जरूर पड़ा है, लेकिन भारत लगातार वैकल्पिक उपायों और रणनीतिक बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है। ग्रीन सान्वी का सुरक्षित आगे बढ़ना इसी दिशा में एक मजबूत संकेत है।

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