उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राजघाट पर आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के समापन के दिन अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह आयोजन प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की अध्यक्षता में कराया जा रहा था। आग लगते ही मौके पर मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 3 से 4 लोगों के घायल होने की खबर है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
तेज हवा बनी हादसे की वजह?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यज्ञ के दौरान हवन कुंड से उठी चिंगारी तेज हवाओं के कारण फैल गई, जिसने देखते ही देखते बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। आयोजन स्थल पर ज्वलनशील सामग्री की मौजूदगी ने आग को और तेजी से फैलाया। घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत क्षेत्र को खाली कराया और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। दमकल की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।
अखिलेश यादव ने उठाए गंभीर सवाल
इस घटना के बाद सियासत भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि इस तरह की घटना सही प्रबंधन की कमी को दर्शाती है। उन्होंने यह भी मांग की कि आयोजन में लगे संसाधनों और व्यवस्थाओं की जांच होनी चाहिए। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जनता में चर्चा है कि इस यज्ञ के नाम पर विभागीय स्तर पर वसूली की गई और खर्च बचाने के लिए विशेषज्ञों की निगरानी में काम नहीं कराया गया।
जांच की मांग और बढ़ी राजनीतिक गर्मी
घटना के बाद अब जांच की मांग तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से अभी तक आग लगने के सही कारणों की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संभावित लापरवाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है, खासकर अगर जांच में किसी तरह की चूक सामने आती है।
