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कतर के गैस प्लांट पर हुए हमले से क्यों घबराया भारत? देश में महंगी हो सकती है LPG

ईरान के कतर गैस प्लांट पर हमले से भारत की 47% गैस सप्लाई पर खतरा, जानें क्या पड़ सकता है असर, कीमतें बढ़ेंगी या सरकार के पास हैं विकल्प?

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब वैश्विक स्तर पर असर दिखाने लगी है और इसका सीधा प्रभाव भारत पर भी पड़ सकता है। हाल ही में ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित बड़े गैस प्लांट पर मिसाइल हमला किया, जिससे वहां आग लग गई और उत्पादन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है। इससे पहले इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया था, जिसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी थी। अब ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले शुरू होने से पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है।

भारत की गैस सप्लाई पर खतरा

भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है, क्योंकि देश अपनी जरूरत की करीब 47 प्रतिशत गैस कतर से आयात करता है। हर साल भारत लगभग 27 मिलियन टन एलएनजी आयात करता है, जिसमें से करीब 12 से 13 मिलियन टन सिर्फ कतर से आता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 24 प्रतिशत और अमेरिका से करीब 11 प्रतिशत गैस मिलती है। ऐसे में कतर के गैस प्लांट पर हमला भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। अगर उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो सप्लाई में बाधा आ सकती है।

महंगी हो सकती है गैस और LPG

अगर कतर में गैस उत्पादन प्रभावित रहता है, तो भारत को दूसरे देशों से महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि घरेलू गैस यानी LPG की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण कई गैस टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ गया है। हालांकि सरकार ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में बताया है और कहा है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है।

क्या हैं भारत के विकल्प?

अगर हालात लंबे समय तक खराब रहते हैं, तो भारत के पास वैकल्पिक रास्ते भी मौजूद हैं। देश अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से एलएनजी आयात बढ़ा सकता है, हालांकि यह महंगा विकल्प होगा। इसके अलावा घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा के अन्य स्रोतों जैसे रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर देने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह संकट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति और मजबूत करनी होगी।

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