हरियाणा विधानसभा में दो राज्यसभा सीटों के चुनाव के परिणामों के बाद कांग्रेस में अंदरूनी कलह बढ़ गई है। हाल ही में हुए चुनावों में कांग्रेस ने एक सीट जीतकर अपनी पकड़ बनाई, लेकिन पांच विधायकों द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांगल के पक्ष में वोट देने की घटना ने पार्टी के भीतर संकट पैदा कर दिया। इस विवाद के बीच प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशन चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चौधरी के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर इस घटना को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है। रामकिशन चौधरी की पत्नी शैली चौधरी नारायणगढ़ से कांग्रेस विधायक हैं, इसलिए इस इस्तीफे की खबर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
राज्यसभा चुनाव पर कांग्रेस का प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा के जनता को बधाई देते हुए कहा, “कांग्रेस विधायकों ने लोकतंत्र की रक्षा और साजिशों का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई। बीजेपी ने हर हथकंडा अपनाया, लेकिन हमारी पार्टी के विधायकों ने नैतिकता और ईमानदारी का परिचय दिया।”
हुड्डा ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव के दौरान साम-दाम दंड भेद और दबाव का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में प्रजातंत्र का गला घोंटने का प्रयास भी किया गया। हालांकि, कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग और दबाव के बावजूद लोकतंत्र की रक्षा की, और राज्यसभा में अपनी सीट हासिल की।
बीजेपी और कांग्रेस का प्रदर्शन
हरियाणा में सत्ताधारी बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में एक-एक सीट पर जीत दर्ज की। बीजेपी की तरफ से संजय भाटिया ने जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस के करमवीर बौद्ध ने अपनी सीट सुनिश्चित की।
चुनाव के दौरान क्रॉस-वोटिंग की शिकायतें भी सामने आईं। बीजेपी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा। इस घटना ने कांग्रेस में नाराजगी बढ़ाई और पार्टी के अंदर चल रही अनबन को उजागर किया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस चुनाव ने हरियाणा में दोनों प्रमुख दलों के बीच बढ़ते तनाव और भविष्य की रणनीति को भी प्रभावित किया है।
आगे की रणनीति और संभावित परिणाम
कांग्रेस का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में मिली जीत प्रजातंत्र और जनतंत्र की जीत है। दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने साफ किया कि पार्टी इस लड़ाई को यहीं नहीं रोकने वाली है और राज्य के कोने-कोने में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अभियान जारी रहेगा।
कांग्रेस के अंदरूनी संकट और कार्यकारी अध्यक्ष के इस्तीफे से पार्टी की साख पर असर पड़ सकता है। वहीं, बीजेपी आगामी चुनावों में इस घटनाक्रम का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेगी। हरियाणा की राजनीतिक रणनीति में अब इन घटनाओं का गहरा असर दिखाई देगा, और आने वाले महीनों में राज्य में हलचल तेज होने की उम्मीद है।
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