Mathura Holi 2026: उत्तर प्रदेश के Mathura में इस बार होलिकादहन के मौके पर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए। कोसी कलां के पास स्थित Phalen Village में सदियों पुरानी परंपरा के तहत एक भक्त जलती होलिका के अंगारों के बीच से निकल गया।
होलिका की आग अभी पूरी तरह दहक रही थी, अंगारे लाल थे और चारों ओर धुआं फैल रहा था। तभी गांव के संजू पंडा प्रकट हुए और बिना किसी हिचक के आग के बीच से गुजर गए। देखने वाले लोग स्तब्ध रह गए। कई श्रद्धालुओं ने इसे भक्ति की शक्ति बताया, तो कुछ इसे चमत्कार मानते नजर आए। यह दृश्य वहां मौजूद हजारों लोगों के लिए अविस्मरणीय बन गया। जैसे ही संजू पंडा आग से सुरक्षित बाहर निकले, पूरा मैदान जयकारों से गूंज उठा।
सदियों पुरानी परंपरा, पीढ़ियों से निभाई जा रही रीत
फालैन गांव में यह अनोखी परंपरा कोई नई नहीं है। बताया जाता है कि यहां सदियों से होलिकादहन के बाद एक व्यक्ति दहकती आग के बीच से निकलता है। पहले यह परंपरा संजू पंडा के पिता और भाई निभाते थे, और अब स्वयं संजू पंडा इसे आगे बढ़ा रहे हैं।
यह आयोजन विश्व प्रसिद्ध पंडा मेले का हिस्सा है, जिसमें देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। ब्रज की होली अपने अलग-अलग रंगों के लिए जानी जाती है—कहीं लठमार होली, कहीं फूलों की होली, तो कहीं हुरंगा। लेकिन फालैन की यह अग्नि परंपरा इसे और भी खास बना देती है। होलिका दहन के तुरंत बाद, जब आग अपने चरम पर होती है, तभी यह रस्म निभाई जाती है। लोगों का मानना है कि यह भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था का प्रतीक है।
एक महीने का तप, फिर अग्नि परीक्षा
इस अद्भुत परंपरा के पीछे कठोर साधना और अनुशासन की कहानी भी जुड़ी है। संजू पंडा एक माह पहले से Prahlad Temple Phalen में तपस्या शुरू कर देते हैं। वह उपवास रखते हैं, नियमित पूजा-पाठ करते हैं और पूरी निष्ठा से भगवान का स्मरण करते हैं।
होलिका दहन के दिन वह मंदिर में करीब तीन घंटे तक हवन करते हैं। जब हवन की अग्नि शांत होती है, तब वह प्रह्लाद कुंड में स्नान करते हैं। इसके बाद ही वह दहकती होलिका की ओर बढ़ते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की परीक्षा है। संजू पंडा का कहना है कि यह सब भगवान की कृपा से संभव होता है। उनके अनुसार, यदि मन में सच्ची श्रद्धा हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
आस्था, परंपरा और ब्रज की अनोखी होली
ब्रज की होली पूरे देश में अपनी अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। फालैन गांव की यह रस्म भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ी मानी जाती है, जहां आस्था ने अग्नि को भी पराजित कर दिया था। हालांकि आधुनिक दौर में ऐसे आयोजनों को लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन गांव के लोगों के लिए यह उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। हर साल हजारों लोग इस दृश्य को देखने पहुंचते हैं और इसे अपनी आंखों में कैद कर लेते हैं।
इस बार भी जब संजू पंडा आग के अंगारों के बीच से सुरक्षित निकले, तो लोगों ने इसे श्रद्धा की जीत बताया। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देखकर हैरान हैं। Mathura की इस होली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ब्रज की धरती पर परंपरा और आस्था आज भी उतनी ही मजबूत है, जितनी सदियों पहले थी।
