स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गो माता के संरक्षण को लेकर 11 मार्च को लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध’ आयोजित करने की घोषणा की है। यह घोषणा उन्होंने श्रीविद्या मठ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान की। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता लाने का अभियान है। उनके अनुसार गो माता का संरक्षण धार्मिक ही नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि 6 मार्च को ‘संकल्प दिवस’ से इस अभियान की शुरुआत होगी और 11 मार्च को लखनऊ में विद्वानों की सभा के साथ इसका मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और विभिन्न संगठनों को भी इसमें शामिल होने का आह्वान किया गया है।
सरकार को 40 दिन की चेतावनी, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रदेश सरकार को 40 दिन की समयसीमा देते हुए गौ माता को ‘राज्य माता’ घोषित करने और प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि 30 दिन बीत चुके हैं और यदि शेष 10 दिनों में सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती, तो 12 मार्च को लखनऊ में धर्म युद्ध का शंखनाद किया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इसके बाद की जिम्मेदारी सरकार की होगी। उनके इस बयान से राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन समाज को अपनी आवाज उठानी होगी। उनका दावा है कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि गो संरक्षण के समर्थन में है।
6 मार्च से यात्रा की शुरुआत, कई जिलों में सभाएं
अभियान की रूपरेखा के अनुसार 6 मार्च को शंकराचार्य घाट पर वीर शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर गंगामाता की पूजा कर संकल्प लिया जाएगा। 7 मार्च को श्रीविद्या मठ से यात्रा शुरू होगी, जो संकटमोचन मंदिर में प्रार्थना के बाद आगे बढ़ेगी। यात्रा के दौरान जौनपुर, सुल्तानपुर और रायबरेली में सभाएं होंगी और रात्रि विश्राम भी वहीं किया जाएगा। 8 मार्च को मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज और उन्नाव में कार्यक्रम होंगे। 9 मार्च को उन्नाव, बांगरमऊ, बघौली और नैमिषारण्य में सभा की योजना है। 10 मार्च को नैमिषारण्य से चलकर सिधौली और इटौंजा होते हुए लखनऊ में प्रवेश किया जाएगा। 11 मार्च को दोपहर सवा दो बजे से कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, आशियाना में विद्वानों की बड़ी सभा आयोजित होगी, जहां गो संरक्षण के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
सामाजिक जागरूकता या बड़ा आंदोलन? आगे क्या होगा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि गो माता भारतीय संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा हैं और उनका संरक्षण समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। दूसरी ओर, यह भी देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। यदि मांगें पूरी नहीं होतीं, तो आंदोलन और तेज होने के संकेत दिए गए हैं। फिलहाल 11 मार्च का कार्यक्रम चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह पहल केवल जागरूकता अभियान बनकर रह जाती है या एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती है।
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