इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज एक ऐसी सुनवाई हो रही है, जिसने कानूनी गलियारों से लेकर धार्मिक जगत तक हलचल मचा दी है। कोर्ट नंबर-72 की कॉज लिस्ट में सीरियल नंबर-142 पर दर्ज मामला शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज केस में यह सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि अदालत का फैसला तय करेगा कि उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिलेगी या पुलिस कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। पूरे प्रदेश की नजरें आज की कार्यवाही पर टिकी हैं और हर कोई जानना चाहता है कि अदालत का रुख किस ओर जाता है।
क्या है पूरा मामला और कैसे बढ़ा विवाद?
इस मामले की शुरुआत प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एक एफआईआर से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि धार्मिक कार्यक्रमों और गुरुकुल से जुड़े आयोजनों के दौरान दो नाबालिगों के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार हुआ। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मामला संवेदनशील होने के कारण जांच को प्राथमिकता दी गई और कथित पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों और अन्य संभावित सबूतों की भी जांच कर रही हैं। चूंकि आरोप गंभीर हैं और नाबालिगों से जुड़े हैं, इसलिए कानून के तहत सख्त प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसी बीच, गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
शंकराचार्य का पक्ष: आरोप निराधार, साजिश की आशंका
सुनवाई से पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सार्वजनिक रूप से आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि जिन बच्चों का जिक्र किया जा रहा है, वे कभी उनके गुरुकुल में पढ़ने नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों और माघ मेले जैसे कार्यक्रमों के दौरान वे लगातार सार्वजनिक मंचों पर रहे, जहां सीसीटीवी और मीडिया कैमरों की मौजूदगी थी। ऐसे में उनके अनुसार, उन पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं।
उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका दावा है कि यह उन्हें बदनाम करने की साजिश हो सकती है। साथ ही उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता के खिलाफ भी उन्होंने कानूनी कार्रवाई शुरू की है। उनके समर्थक इसे धार्मिक और सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि विरोधी पक्ष का कहना है कि सच्चाई अदालत में सामने आएगी।
अदालत में क्या होगा और आगे की राह क्या?
आज की सुनवाई में अदालत सबसे पहले यह देखेगी कि क्या अग्रिम जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। बचाव पक्ष यह दलील दे सकता है कि उनके मुवक्किल जांच में सहयोग करने को तैयार हैं और गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष मेडिकल रिपोर्ट, बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह तर्क रख सकता है कि मामला गंभीर है और जांच प्रभावित हो सकती है।
पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में अदालतें विशेष सावधानी बरतती हैं। यदि अदालत को लगे कि जांच में बाधा नहीं आएगी, तो सशर्त राहत मिल सकती है। लेकिन यदि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर प्रतीत होते हैं, तो जमानत याचिका खारिज भी हो सकती है। किसी भी स्थिति में अंतिम फैसला सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
आज की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो जाएगा कि फिलहाल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को राहत मिलती है या कानूनी दबाव और बढ़ता है। हालांकि, अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद ही होगा। फिलहाल पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अदालत का फैसला ही आगे की दिशा तय करेगा।
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