New Income Tax Act 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश करते हुए देश के करोड़ों करदाताओं से जुड़ा बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। यह कानून अगले वित्त वर्ष 2026-27 से प्रभावी होगा और करीब छह दशक पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि मौजूदा इनकम टैक्स कानून बेहद जटिल, लंबा और आम करदाता के लिए समझना मुश्किल हो गया था। इसी वजह से नए कानून को सरल भाषा, कम धाराओं और आसान ढांचे के साथ तैयार किया गया है। खास बात यह है कि नए इनकम टैक्स एक्ट में कोई नई टैक्स दर नहीं जोड़ी गई है, बल्कि मौजूदा नियमों को ही आसान और पारदर्शी बनाया गया है ताकि टैक्सपेयर्स को बार-बार चार्टर्ड अकाउंटेंट या कानूनी सलाह पर निर्भर न रहना पड़े।
दंड की जगह जुर्माना, गलत रिपोर्टिंग पर भी राहत
नए इनकम टैक्स एक्ट की सबसे अहम खासियत यह है कि इसमें करदाताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि अब कई मामलों में दंड की जगह टैक्स और जुर्माना देकर छूट ली जा सकेगी। यानी छोटी-मोटी गलतियों पर जेल या सख्त सजा की बजाय आर्थिक दंड का विकल्प मिलेगा। गलत रिपोर्टिंग के मामलों में भी छूट का प्रावधान किया गया है, जिससे ईमानदार करदाताओं को बेवजह डरने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा अदालतों को भी यह अधिकार दिया जाएगा कि वे कुछ मामलों में सजा को जुर्माने में बदल सकें। सरकार का मानना है कि इससे टैक्स विवाद कम होंगे और करदाता स्वेच्छा से अनुपालन के लिए आगे आएंगे। यही नहीं, लागू टैक्स दर के अलावा अतिरिक्त 10 प्रतिशत तक की छूट दिए जाने का भी प्रस्ताव है, जिससे टैक्स बोझ कुछ हद तक कम हो सकता है।
ITR फॉर्म होंगे आसान, डेटा सेंटर कंपनियों को खास छूट
नए इनकम टैक्स कानून का एक बड़ा उद्देश्य टैक्स फाइलिंग को आसान बनाना है। इसी दिशा में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म को पूरी तरह सरल बनाया जाएगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के प्रमुख रवि अग्रवाल पहले ही कह चुके हैं कि नए कानून के तहत आईटीआर फॉर्म और नियमों को पहले से ज्यादा स्पष्ट और यूजर-फ्रेंडली रखा जाएगा। सरकार चाहती है कि आम करदाता बिना किसी परेशानी के खुद ही रिटर्न दाखिल कर सके। इसके साथ ही बजट 2026 में भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने वाली कंपनियों को टैक्स छूट देने का भी प्रस्ताव किया गया है। इससे देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा और निवेश आकर्षित होगा। सरकार मानती है कि टैक्स नियम आसान होने से विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
कम धाराएं, कम शब्द, ज्यादा स्पष्टता: क्या बदलेगा नए कानून में
नया इनकम टैक्स एक्ट सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी संरचना भी पूरी तरह बदली गई है। 1961 के पुराने आयकर अधिनियम में जहां 819 धाराएं और 47 अध्याय थे, वहीं नए कानून में इन्हें घटाकर 536 धाराएं और 23 अध्याय कर दिया गया है। शब्दों की संख्या भी करीब 5.12 लाख से घटाकर 2.6 लाख कर दी गई है, जिससे कानून को पढ़ना और समझना आसान हो सके। पुराने कानून के लंबे और जटिल पैराग्राफ की जगह अब 39 नई सारणियां और 40 नए सूत्र शामिल किए गए हैं, ताकि टैक्स की गणना और नियमों की व्याख्या साफ-साफ समझ में आए। सरकार का कहना है कि यह बदलाव करदाताओं, टैक्स अधिकारियों और अदालतों—तीनों के लिए फायदेमंद होगा और टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाएगा।
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