UP के बागपत जिले के बिनौली थाना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत, मां की ममता और हौसले की मिसाल कायम कर दी। मांगरौली गांव के सामने एक ई-रिक्शा अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। इस हादसे में ई-रिक्शा में सवार कई लोग घायल हो गए, लेकिन सबसे गंभीर स्थिति 12 वर्षीय ऋतिक की हो गई। ई-रिक्शा पलटते ही वह सबसे नीचे दब गया, जिससे उसका दम घुटने लगा और कुछ ही पलों में वह बेहोश हो गया। हादसे में ऋतिक की मां बीना भी घायल हो गई थीं, लेकिन बेटे को बेदम हालत में देख उनका दर्द और डर दोनों चरम पर पहुंच गए। सड़क पर अफरा-तफरी मच गई, लोग इकट्ठा हो गए, लेकिन कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
जब भीड़ बनी तमाशबीन, तब मां बनी बेटे की जीवनरेखा
ऋतिक के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। सांसें थमी हुई लग रही थीं। आसपास मौजूद लोग उसे देखकर यही मान बैठे कि अब कुछ नहीं हो सकता। कुछ लोग वीडियो बनाने लगे, कुछ केवल देखते रहे। ऐसे में घायल मां बीना पहले तो कुछ पल तक बेटे को एकटक निहारती रहीं, फिर फफक-फफक कर रो पड़ीं। लेकिन अगले ही पल उन्होंने खुद को संभाला। मां की ममता ने हार मानने से इनकार कर दिया। बीना ने बेटे की छाती को दोनों हाथों से दबाना शुरू किया, उसे होश में लाने की कोशिश की, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्होंने आखिरी दांव खेला। उन्होंने बेटे के मुंह से मुंह लगाकर उसके अंदर सांस भरनी शुरू कर दी। सड़क किनारे खड़ी भीड़ यह सब देख सन्न रह गई, लेकिन मां का हौसला नहीं डगमगाया।
हर सेकंड था निर्णायक, 10 मिनट तक मौत से जंग
करीब 5 से 10 मिनट तक बीना लगातार बेटे को CPR देती रहीं। हर सांस के साथ वह बेटे की जिंदगी के लिए दुआ करती रहीं। यह वो पल थे, जब एक मां अकेले मौत से लड़ रही थी और वक्त थमा हुआ सा लग रहा था। अचानक ऋतिक के शरीर में हल्की सी हलचल हुई। उसके सीने में हल्का उतार-चढ़ाव दिखा। यह देख मां ने उसे तुरंत अपनी गोद में भर लिया। बेटे की सांस लौट आई थी। वहां मौजूद लोगों ने भी राहत की सांस ली। कुछ देर बाद मौके पर एंबुलेंस पहुंची और सभी घायलों को बिनौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जिस बेटे को कुछ मिनट पहले मृत मान लिया गया था, वह अब जिंदा था — सिर्फ मां की हिम्मत और ममता की वजह से।
डॉक्टरों ने क्या कहा, अब कैसी है मां-बेटे की हालत
बिनौली सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि हादसे में घायल सभी लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया। ऋतिक और उसकी मां के हाथ, पैर और सिर में चोटें आई थीं, इसलिए उन्हें एहतियातन जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां सीटी स्कैन कराया जाना था। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर सांस मिलने की वजह से ऋतिक की जान बच सकी। यदि कुछ मिनट और देर हो जाती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। फिलहाल मां और बेटा दोनों खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मां की ममता के आगे मौत भी हार मान सकती है। वहीं, यह सवाल भी छोड़ गई कि अगर भीड़ समय पर मदद करती तो हालात और बेहतर हो सकते थे।
