प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान उस वक्त हालात तनावपूर्ण हो गए, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने करीब 200 अनुयायियों के साथ संगम नोज की ओर बढ़ने लगे। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह इलाका सुरक्षा कारणों से एक दिन पहले ही आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया था। सुबह करीब 9 बजे, जब कोहरे और अमृत स्नान की वजह से संगम क्षेत्र में भारी भीड़ मौजूद थी, उसी दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों और एक पालकी के साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की और वैकल्पिक समय या मार्ग से स्नान कराने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन स्वामी और उनके समर्थक संगम नोज पर ही जाने की मांग पर अड़े रहे। इसी दौरान बैरियर तोड़ने और जबरन आगे बढ़ने की कोशिश की गई, जिससे मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अनुयायियों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
तीन घंटे तक बाधित रहा रास्ता, आम श्रद्धालुओं को हुई परेशानी
पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार के मुताबिक, स्थिति तब और गंभीर हो गई जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और वापसी का रास्ता भी अवरुद्ध कर दिया। आरोप है कि करीब तीन घंटे तक मुख्य मार्ग बंद रहा, जिससे माघ मेले में स्नान के लिए आए हजारों आम श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस का यह भी कहना है कि अव्यवस्था के दौरान कुछ समर्थकों ने छोटे बच्चों को आगे कर दबाव बनाने की कोशिश की, जिससे भगदड़ का खतरा और बढ़ गया। प्रशासन का दावा है कि उस समय संगम क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ थी और 200 लोगों के एक साथ, रथ और पालकी के साथ आगे बढ़ने से बड़ा हादसा हो सकता था। इसी आशंका के चलते पुलिस ने सख्ती दिखाई और पूरे घटनाक्रम को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया। इस पूरे मामले के CCTV फुटेज भी मौजूद बताए जा रहे हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
DM और मंडलायुक्त का बयान
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि परंपरा और तय नियमों के विपरीत बिना अनुमति संगम पहुंचना गलत था। उन्होंने बताया कि बार-बार अनुरोध के बावजूद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी के साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंचे और पुलिस के निर्देशों का पालन नहीं किया। DM के अनुसार, बैरियर तोड़ने, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की और जनसामान्य के लिए रास्ता अवरुद्ध करने जैसे सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रयागराज मंडल की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने भी कहा कि इतनी भारी भीड़ के बीच बिना अनुमति इस तरह का कदम सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर था। उन्होंने स्पष्ट किया कि माघ मेले में सभी संतों और अखाड़ों के लिए समान नियम लागू हैं और किसी को भी व्यवस्था से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
विवाद के बाद धरने पर बैठे शंकराचार्य
पुलिस और प्रशासन से हुए टकराव के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक प्रशासन उन्हें ससम्मान और तय प्रोटोकॉल के तहत संगम स्नान के लिए नहीं ले जाएगा, तब तक वे गंगा स्नान नहीं करेंगे। स्वामी ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए इसे परंपराओं का अपमान बताया और मीडिया को अपने शिविर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए आमंत्रित किया है। इस घटनाक्रम के बाद माघ मेले की व्यवस्थाओं, भीड़ प्रबंधन और संतों के लिए बनाए गए नियमों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि बता रहा है, वहीं दूसरी ओर संत समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है। फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और CCTV फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, लेकिन इस घटना ने माघ मेले की व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
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