Monday, February 2, 2026
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महिला को प्रेग्नेंट करो, 10 लाख झटपट पाओ!” — बिहार में सेक्स-जॉब के नाम पर चल रहा था खौफनाक साइबर फ्रॉड

बिहार के नवादा में ‘महिला को गर्भवती करो और 10 लाख पाओ’ जैसे फर्जी ऑफर से चल रहे साइबर ठगी गैंग का खुलासा।

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बिहार के नवादा जिले में सामने आया एक हैरान करने वाला साइबर ठगी का मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और व्हाट्सएप पर फैले एक अजीबोगरीब विज्ञापन में दावा किया जा रहा था कि जो व्यक्ति नि:संतान महिलाओं को गर्भवती करेगा, उसे 10 लाख रुपये तक की कमाई होगी। पहली नजर में यह ऑफर जितना चौंकाने वाला लगता है, उतना ही खतरनाक भी था। इसी लालच के जरिए साइबर ठगों का एक संगठित गिरोह लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था।

नवादा साइबर थाना की जांच में सामने आया कि यह कोई एक-दो लोगों की हरकत नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा एक साइबर फ्रॉड नेटवर्क था, जो समाज की कमजोर मानसिकताओं और जरूरतों को निशाना बना रहा था।

फर्जी कंपनियों के नाम पर लोगों का भरोसा जीतने की साजिश

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह ठगी गैंग खुद को भरोसेमंद दिखाने के लिए ‘धनी फाइनेंस’, ‘CBI सस्ते लोन’, ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब’ और ‘प्लेबॉय सर्विस’ जैसे भ्रामक नामों का इस्तेमाल करता था। इन नामों से सोशल मीडिया पर आकर्षक पोस्ट और विज्ञापन डाले जाते थे, जिनमें मोटी कमाई, आसान काम और गोपनीयता का भरोसा दिलाया जाता था।

जो लोग इन विज्ञापनों के संपर्क में आते थे, उनसे व्हाट्सएप चैट या कॉल के जरिए बात की जाती थी। ठग खुद को एजेंट या मैनेजर बताकर भरोसा जीतते और कहते कि अगर गर्भधारण सफल नहीं भी हुआ, तो भी आधी रकम यानी 5 लाख रुपये दी जाएगी। इसी भरोसे में आकर कई लोग आगे बढ़ जाते थे।

ऐसे होती थी ठगी: रजिस्ट्रेशन से होटल चार्ज तक

जैसे ही कोई व्यक्ति इस तथाकथित ‘प्रेग्नेंट जॉब’ के लिए हामी भरता था, उससे सबसे पहले रजिस्ट्रेशन फीस मांगी जाती थी। इसके बाद मेडिकल टेस्ट, फाइल चार्ज, होटल बुकिंग, सुरक्षा शुल्क और प्रोसेसिंग फीस जैसे नामों पर लगातार पैसे वसूले जाते थे।

ठग पीड़ितों को सुंदर महिलाओं या मॉडल्स की फर्जी तस्वीरें भेजते थे ताकि वे और अधिक भरोसा कर लें। हर चरण पर यह कहा जाता था कि “बस यह आखिरी भुगतान है, इसके बाद आपको बड़ी रकम मिल जाएगी।” इस तरह पीड़ित तब तक पैसे भेजते रहते थे, जब तक उन्हें अहसास नहीं हो जाता कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। सबसे गंभीर बात यह थी कि कई लोग सामाजिक बदनामी और शर्म के डर से शिकायत तक नहीं कर पाते थे, जिससे ठगों के हौसले और बुलंद हो जाते थे।

पुलिस की कार्रवाई और आम लोगों के लिए चेतावनी

नवादा के पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने हिसुआ थाना क्षेत्र के मनवा गांव निवासी रंजन कुमार को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को निरुद्ध किया गया है। आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जा रहा था।
इस मामले में साइबर थाना कांड संख्या 03/26 के तहत बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। नवादा साइबर थाना इंचार्ज और डीएसपी निशु मल्लिक ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी असामान्य, लालचभरे या अवैध दावे पर भरोसा न करें। यदि कोई भी संदिग्ध विज्ञापन या कॉल मिले, तो तुरंत साइबर थाना या साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें। पुलिस का कहना है कि इस तरह के साइबर ठगी गिरोह पहले भी नवादा और आसपास के इलाकों में सक्रिय रहे हैं और भविष्य में इनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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