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एक रुपये की लागत और बीस रुपये की कमाई! विदेशी सब्जी की खेती से कैसे लखपति बन रहे किसान

गयाजी के खंजाहांपुर गांव में ब्रोकली की खेती से किसान लाखों कमा रहे हैं। कम लागत, ज्यादा मुनाफा और बढ़ती मांग ने इसे ‘ब्रोकली वाला गांव’ बना दिया है। जानें खेती के टिप्स।

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बिहार के गयाजी जिले का खंजाहांपुर गांव आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। कभी पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाला यह गांव अब ब्रोकली की खेती के लिए जाना जा रहा है। गांव के करीब 100 किसान इस विदेशी सब्जी की खेती कर रहे हैं और हर साल अच्छी कमाई कर रहे हैं। कम लागत, कम जोखिम और तेज मुनाफे की वजह से ब्रोकली यहां के किसानों की पहली पसंद बन चुकी है। पहले जहां लोग फूल गोभी और पत्ता गोभी की खेती करते थे, वहीं अब खेतों में हरी-भरी ब्रोकली लहलहाती नजर आती है। इसकी बढ़ती मांग ने न सिर्फ खंजाहांपुर, बल्कि आसपास के गांवों के किसानों को भी नई राह दिखा दी है। धीरे-धीरे यह इलाका ‘ब्रोकली वाला गांव’ के नाम से मशहूर होता जा रहा है।

छोटी जमीन, बड़ा मुनाफा: किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

ब्रोकली की खेती से हो रहे मुनाफे की कहानी किसान उमेश कुमार बखूबी बताते हैं। उनके मुताबिक गांव में लगभग 100 एकड़ में ब्रोकली की खेती हो रही है। उन्होंने शुरुआत सिर्फ 5 कट्ठे जमीन से की थी और पहली ही फसल में उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा मुनाफा मिला। एक ब्रोकली की कीमत आमतौर पर 20 से 30 रुपये तक रहती है, जबकि मांग बढ़ने पर यही कीमत 40 से 50 रुपये तक पहुंच जाती है। उमेश बताते हैं कि एक कट्ठा जमीन से 600 से 700 ब्रोकली आसानी से निकल जाती हैं, जिनका कुल वजन 6 से 7 क्विंटल तक होता है। इस बार उन्होंने पहले से ज्यादा जमीन में खेती की है और आगे और विस्तार की योजना बना रहे हैं। किसानों का कहना है कि इतनी कम जमीन से इतनी अच्छी कमाई पहले कभी संभव नहीं थी।

एक रुपये की लागत, बीस रुपये का फायदा

खंजाहांपुर के किसानों के लिए ब्रोकली की खेती किसी वरदान से कम नहीं है। उमेश कुमार बताते हैं कि एक कट्ठा जमीन में ब्रोकली की खेती पर ज्यादा से ज्यादा एक हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें बीज, खाद और सिंचाई का खर्च शामिल होता है। इसके बदले कम से कम 20 हजार रुपये की बिक्री हो जाती है, यानी एक रुपये की लागत पर 20 रुपये का मुनाफा। अगर एक एकड़ की बात करें तो शुद्ध इनकम करीब 5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि यह खेती किसानों को लखपति बना रही है। आसपास के गांवों में भी किसान इस मॉडल को अपनाने लगे हैं। कम समय में तैयार होने वाली फसल और बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग ने इसे बेहद फायदेमंद बना दिया है।

बोधगया से शुरू हुआ सफर

ब्रोकली की खेती की शुरुआत इस इलाके में बोधगया से हुई थी। किसान संजय कुमार बताते हैं कि कुछ साल पहले बोधगया की मोनेस्ट्री के जरिए किसानों को ब्रोकली के बीज मिले थे। शुरुआत में यह सब्जी विदेशी पर्यटकों और होटलों तक ही सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे स्थानीय लोगों ने भी इसका स्वाद पसंद करना शुरू कर दिया। आज हालात यह हैं कि बिहार के बाजारों में ब्रोकली की मांग तेजी से बढ़ रही है। पोषण से भरपूर होने के कारण लोग इसे सेहत के लिए भी अच्छा मानते हैं। किसान बताते हैं कि सही समय पर रोपाई, नियमित सिंचाई और हल्की देखभाल से ब्रोकली की फसल बेहतरीन होती है। खंजाहांपुर के किसान अब दूसरे जिलों के लोगों को भी खेती के टिप्स दे रहे हैं, जिससे यह मॉडल पूरे बिहार में फैलने की उम्मीद जगा रहा है।

 

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