कांग्रेस स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में माहौल औपचारिक कम और अनौपचारिक ज्यादा था. मुख्य कार्यक्रम के बाद चाय-नाश्ते का दौर चल रहा था, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आपस में बातचीत कर रहे थे. इसी दौरान राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह आमने-सामने आए. हाथ मिलाते हुए राहुल गांधी ने मुस्कुराकर कहा, “कल आपने बदमाशी कर दी.” यह सुनते ही वहां मौजूद नेता हंस पड़े. दिग्विजय सिंह ने भी इस टिप्पणी को हल्के-फुल्के अंदाज में लिया. मौके पर सोनिया गांधी भी मौजूद थीं और पूरा दृश्य कांग्रेस के भीतर सहज संवाद का संकेत देता दिखा. हालांकि, यह मजाक सिर्फ मजाक नहीं था, बल्कि इसके पीछे बीते 24 घंटों में मचे सियासी हलचल की पूरी कहानी छिपी थी.
RSS-BJP संगठन की तारीफ और बढ़ता सियासी तापमान
दरअसल, कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक से ठीक पहले दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसने पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा छेड़ दी. पोस्ट में लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने RSS और बीजेपी संगठन की तारीफ की थी. उन्होंने लिखा कि कैसे एक जमीनी स्वयंसेवक संगठन की ताकत के दम पर प्रदेश का मुख्यमंत्री और फिर देश का प्रधानमंत्री बन सकता है. साथ ही उन्होंने संगठनात्मक मजबूती को रेखांकित करते हुए इसे ‘संघटन की शक्ति’ बताया. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता द्वारा RSS-BJP की खुलकर तारीफ को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे कि क्या पार्टी के भीतर रणनीति को लेकर अलग-अलग सोच उभर रही है.
राहुल गांधी का तंज: संकेत या सिर्फ मजाक?
राहुल गांधी की ‘बदमाशी’ वाली टिप्पणी को कई नेता हल्के मजाक के तौर पर देख रहे हैं, लेकिन सियासी गलियारों में इसके मायने गहराई से निकाले जा रहे हैं. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी पार्टी के भीतर खुली बहस और अलग राय रखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन RSS-BJP जैसे वैचारिक प्रतिद्वंद्वी की सार्वजनिक तारीफ को लेकर सतर्कता भी जरूरी मानते हैं. यही वजह है कि राहुल ने बिना किसी औपचारिक टिप्पणी के, मजाकिया लहजे में अपनी बात कह दी. इससे संदेश भी चला गया और माहौल भी खराब नहीं हुआ. पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि यह घटना कांग्रेस के भीतर संवाद की संस्कृति को दिखाती है, जहां मतभेद भी मुस्कान के साथ जाहिर किए जा सकते हैं.
कांग्रेस के अंदर संगठन को लेकर मंथन जारी
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कांग्रेस में संगठनात्मक मजबूती के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. दिग्विजय सिंह का बयान जहां संगठन से सीखने की बात करता है, वहीं राहुल गांधी लगातार जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं. कांग्रेस नेतृत्व यह मानता है कि वैचारिक लड़ाई के साथ-साथ मजबूत संगठन भी जरूरी है. इंदिरा भवन में हुई यह मुलाकात भले ही हंसी-मजाक में खत्म हुई हो, लेकिन इसके जरिए यह साफ हो गया कि कांग्रेस के भीतर संगठन, रणनीति और राजनीतिक संदेश को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस बहस को किस दिशा में ले जाती है.
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