Monday, February 2, 2026
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दो आधार, फर्जी विजिटिंग कार्ड और VIP पहुंच का झांसा… डिप्टी सीएम केशव मौर्य तक पहुंचा जालसाज, कैसे हुआ बेनकाब

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मिलने पहुंचे युवक के पास मिले दो आधार कार्ड और फर्जी विजिटिंग कार्ड. जालसाज दशरथ पाल के कई राज खुले, पुलिस जांच जारी.

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खुद को दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का प्रतिनिधि बताकर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मिलने पहुंचे युवक की कहानी अब परत-दर-परत खुलती जा रही है. आरोपी की पहचान दशरथ पाल के रूप में हुई है, जो नोएडा के दादरी क्षेत्र के होड़ी बछेड़ी गांव का रहने वाला बताया जा रहा है. शुरुआती तौर पर उसने ऐसा माहौल बनाया मानो उसकी राजनीतिक पहुंच बेहद मजबूत हो और वह मंत्रियों से सीधे संपर्क रखता हो. इसी रौब के सहारे वह एक मंत्री के आवास तक पहुंचा और फिर डिप्टी सीएम से मिलने की कोशिश की. लेकिन सुरक्षा जांच के दौरान उसके दावों की सच्चाई सामने आ गई. जांच में यह साफ हुआ कि आरोपी ने फर्जी पहचान और दस्तावेजों के सहारे VIP पहुंच बनाने की कोशिश की थी.

दो आधार कार्ड और फर्जी दस्तावेजों का जाल

पुलिस की तलाशी में आरोपी के पास से दो अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए, जिनमें नाम और पते अलग-अलग थे, लेकिन दोनों पर फोटो उसी की लगी हुई थी. यह तथ्य सामने आते ही मामला साधारण नहीं रह गया. इसके अलावा उसकी जेब से बुलंदशहर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष के नाम का एक विजिटिंग कार्ड भी मिला. जब पुलिस ने इस संबंध में वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष से संपर्क किया, तो उन्होंने साफ तौर पर इससे इनकार कर दिया और लिखित रूप में स्पष्ट किया कि दशरथ नाम का कोई व्यक्ति कभी जिलाध्यक्ष नहीं रहा. इससे यह जाहिर हो गया कि आरोपी लंबे समय से फर्जी पहचान और राजनीतिक नामों का सहारा लेकर लोगों को प्रभावित कर रहा था. पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन को भी जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि उसके संपर्कों और गतिविधियों से जुड़े कई और राज सामने आ सकते हैं.

व्यवसायी और स्थानीय लोगों को झांसे में लिया

जांच में यह भी सामने आया है कि दशरथ पाल अकेले नहीं आया था. उसके साथ जेवर की विलासपुर नगर पंचायत की चेयरमैन के पति संजय सिंह, एक व्यवसायी भान सिंह और एक ड्राइवर भी मौजूद थे. आरोपी ने इन लोगों पर अपनी कथित राजनीतिक पहुंच का प्रभाव डालते हुए कहा था कि वह उन्हें मंत्रियों से मिलवा सकता है. व्यवसायी भान सिंह को अपने क्षेत्र में एक चौराहे पर प्रतिमा लगवानी थी और दशरथ ने भरोसा दिलाया था कि वह डिप्टी सीएम से अनुमति दिलवा देगा. इसी भरोसे में आकर ये लोग उसके साथ लखनऊ पहुंचे. हालांकि पुलिस जांच में यह स्पष्ट किया गया है कि साथ आए इन तीनों लोगों की भूमिका संदिग्ध नहीं पाई गई है और औपचारिक पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. यह मामला दिखाता है कि कैसे कुछ लोग झूठी पहचान और बड़े नामों के सहारे आम लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं.

सुरक्षा में सेंध और आगे की जांच

पुलिस पूछताछ में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. आरोपी ने आठ दिसंबर को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के नोएडा दौरे के दौरान भी सुरक्षा घेरा पार कर कार्यक्रम स्थल तक पहुंच बनाई थी. वहां उसने डिप्टी सीएम से कुछ दूरी पर खड़े होकर एक फोटो खींची थी, जिसे बाद में एडिट कर इस तरह पेश किया गया कि वह उनके बेहद करीब खड़ा दिखे. इस तस्वीर का इस्तेमाल वह अपनी कथित पहुंच साबित करने के लिए करता था. गौतमपल्ली थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और उसके आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल की फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो सकेगा कि वह अकेले यह सब कर रहा था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी काम कर रहा था. यह मामला VIP सुरक्षा, फर्जी पहचान और राजनीतिक नामों के दुरुपयोग को लेकर कई अहम सवाल खड़े करता है.

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