प्रयागराज में रविवार को उस समय हर कोई दंग रह गया, जब सड़कों पर एक साथ 39 दूल्हों की अनोखी बरात निकली। यह दृश्य इतना आकर्षक और अनोखा था कि राह चलते लोग वहीं रुक गए और बरात के उत्साह में शामिल हो गए। साहू एकता मंच द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह के तहत सिविल लाइंस स्थित पत्थर गिरजाघर से केपी कॉलेज तक यह भव्य शोभायात्रा निकाली गई। दूल्हे पारंपरिक परिधानों में सजे थे और घोड़ों पर शान से बैठे नजर आ रहे थे। ढोल-नगाड़ों की गूंज और बरातियों के उत्साहपूर्ण नृत्य ने पूरे माहौल को और भी खास बना दिया। यह आयोजन मंच का 15वां सामूहिक विवाह समारोह था, जिसने शहर में अनोखा इतिहास रच दिया।
दूल्हों को अक्षत तिलक लगाकर दी गई बधाई
सामूहिक विवाह की शुरुआत दूल्हों के स्वागत से हुई। मंच की प्रमुख सदस्यों — सुधा गुप्ता, शोभा गुप्ता और डॉ. नीता साहू — ने सभी 39 दूल्हों को अक्षत तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया। इस दौरान पूरा कैंपस उत्साह और ऊर्जा से भरा हुआ था। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद साहू भी इस मौके पर मौजूद रहे और सभी दूल्हों को खुशहाल वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया। समारोह में आए मेहमानों ने इस अनोखे आयोजन की सराहना की और सामूहिक विवाह की इस परंपरा को समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बताया।
पहले दिया पौधा, फिर हुई जयमाल की रस्म
इस सामूहिक विवाह की सबसे दिलचस्प और प्रेरणादायक बात यह रही कि आयोजक मंडल ने हर जोड़े को मंच पर पौधा भेंट किया। यह संदेश दिया गया कि नए जीवन की शुरुआत के साथ पेड़ लगाना भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। जैसे ही पौधा देने की रस्म पूरी हुई, जयमाल की परंपरा शुरू हुई। वर-वधू द्वारा एक-दूसरे को माला पहनाते ही वहां मौजूद सैकड़ों लोगों ने फूलों की बारिश कर दी। जयमाल के दौरान बजते संगीत और तालियों की गड़गड़ाहट ने पूरे माहौल को बेहद भावुक और उत्साहपूर्ण बना दिया।
सात फेरे लेकर जोड़ों ने शुरू किया नया जीवन
मंडप में सभी 39 जोड़ों ने वैदिक विधि-विधान के साथ अग्नि के सात फेरे लिए। पुरोहितों द्वारा मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण धार्मिक और पवित्र प्रतीत हो रहा था। फेरे लेते समय हर जोड़ा भावुक और खुश दिखाई दे रहा था। विवाह के बाद साहू एकता मंच की ओर से सभी नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी शुरू करने के लिए आवश्यक सामान उपहार में दिया गया। समारोह के अंत में वर-वधू और उनके परिवारों ने आयोजकों का धन्यवाद किया। सामूहिक विवाह का यह भव्य आयोजन न केवल सामाजिक एकता का प्रतीक रहा, बल्कि आर्थिक बोझ से जूझ रहे परिवारों के लिए राहत का बड़ा माध्यम भी साबित हुआ।
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