लखनऊ में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब नगर निगम से जुड़ी कूड़ा प्रबंधन कंपनी में काम कर रहे करीब 160 सफाईकर्मी अचानक काम छोड़कर चले गए। कंपनी ने बताया कि कर्मचारियों से पहचान और नागरिकता संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे। जैसे ही दस्तावेज़ जमा कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, एक बड़ी संख्या में कर्मचारी बिना बताए काम छोड़कर गायब हो गए।
कंपनी के प्रबंधन के मुताबिक, यह कार्रवाई नियमित दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा थी, जो समय-समय पर सभी कर्मचारियों पर लागू होती है। हालांकि, बड़ी संख्या में कर्मचारियों का एक साथ गायब होना अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
महापौर का दावा—कर्मचारी संदिग्ध, जांच में सहयोग नहीं
लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि दस्तावेज़ जांच के दौरान कई कर्मचारी संदिग्ध पाए गए। उनके अनुसार कई लोग खुद को असम का निवासी बताते थे, लेकिन आधार और अन्य पहचान पत्रों की पुष्टि नहीं हो पा रही थी।
महापौर के मुताबिक, नगर निगम अब कर्मचारियों की नागरिकता की स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रहा है। जहां नागरिकता पर सवाल हों, वहां आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में सिर्फ प्राथमिक जांच चल रही है और किसी पर ठोस आरोप नहीं लगाए गए हैं। यह पूरा मामला तथ्यों की पुष्टि पर आधारित होगा।
कंपनी के स्तर पर दस्तावेज़ मांगते ही कर्मचारी गायब
कूड़ा प्रबंधन का काम संभाल रही निजी कंपनी ने बताया कि सभी कर्मचारियों से बुनियादी दस्तावेज मांगे गए थे—जैसे आधार कार्ड, पहचान पत्र, निवास प्रमाण आदि। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज़ सत्यापन शुरू होते ही कई कर्मचारी छुट्टी का बहाना बनाकर गए, और फिर वापस नहीं लौटे।
कंपनी के प्रबंधन का कहना है कि नगर निगम के नियमों के तहत सभी कर्मचारियों के दस्तावेज़ सुरक्षित रखना आवश्यक है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बरदाश्त नहीं की जा सकती, क्योंकि सफाई कार्य शहर की सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़ा होता है।
इसी बीच, कुछ कर्मचारी ऐसे भी मिले जिन्होंने दस्तावेज़ उपलब्ध कराए और जांच में सहयोग किया। लेकिन बड़ी संख्या में कर्मचारियों के अचानक छोड़कर जाने से कंपनी ने इसे संदिग्ध मानते हुए नगर निगम को सूचना दी।
प्रशासनिक जांच शुरू, कई सवाल खड़े
मामला सामने आने के बाद नगर निगम और प्रशासन दोनों की ओर से संयुक्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फिलहाल यह जांच हो रही है कि वे कर्मचारी वास्तव में कौन थे, कहां रहते थे और उनकी भर्ती कैसे हुई।
शहर के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेज़ जांच रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन 160 कर्मचारियों का एक साथ गायब होना कई नए सवाल खड़े करता है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या कोई गिरोह इस तरह की पहचान छुपाकर शहर में काम कर रहा था।
जांच एजेंसियों ने कंपनी से संबंधित रिकॉर्ड, कर्मचारियों के पुराने एंट्री-एक्जिट विवरण, उपस्थिति रजिस्टर और भुगतान जानकारी मांगी है ताकि पता लगाया जा सके कि इन कर्मियों का वास्तविक पता क्या था।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी factual evidence के आधार पर ही आगे बढ़ाई जाएगी और किसी भी समुदाय या समूह को बिना प्रमाण के निशाना नहीं बनाया जाएगा।
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