Monday, March 2, 2026
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महिलाओं की गुहार, बच्चों की चीखें… फिर भी नहीं रुका बुलडोज़र, बरेली में दो बारातघर ढहे

बरेली के सूफी टोला क्षेत्र में बीडीए की कार्रवाई के दौरान दो बड़े बारातघरों पर बुलडोज़र चला। विरोध, अफरा-तफरी और महिलाओं की अपील के बावजूद अवैध हिस्सों को ढहाया गया।

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बरेली के पुराने शहर के सूफी टोला इलाके में मंगलवार और बुधवार को ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने पूरे क्षेत्र में बेचैनी और तनाव बढ़ा दिया। दो बड़े बारात घर—एवान-ए-फरहत और गुड मैरिज होम—पर बीडीए टीम ने अवैध निर्माण के आरोप में कार्रवाई शुरू की। जैसे ही बुलडोज़र की आवाज़ इलाके में गूंजी, लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग चीखते-चिल्लाते बाहर निकल आए और कार्रवाई रोकने की अपील करने लगे। बावजूद इसके प्रशासनिक टीम अपने प्लान के अनुसार आगे बढ़ती रही।

महिलाओं और बच्चों ने लगाई गुहार

ध्वस्तीकरण के दौरान सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में उठाकर बुलडोज़र के सामने खड़ी हो गईं। उनका कहना था कि बारातघर उनके समुदाय के महत्वपूर्ण आयोजन स्थलों में से एक हैं और अचानक कार्रवाई के कारण लोग बेहद परेशान हैं। महिलाओं ने अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाई कि कम से कम सुनवाई कर ली जाए और किसी वैकल्पिक समाधान पर विचार हो। लेकिन पुलिस और बीडीए की टीम सुरक्षा घेरा बनाए हुए थी, जिससे कोई भी मशीनों के बेहद करीब न पहुंच सके।

दो दिनों में तेज़ हुआ ध्वस्तीकरण अभियान

मंगलवार को शुरू हुई कार्रवाई लगभग पांच घंटे चली, जिसमें दोनों बारातघरों का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा ढहा दिया गया। प्रशासन के अनुसार यह निर्माण पहले से नोटिस दिए जाने के बाद भी नहीं हटाया गया था। बुधवार सुबह बीडीए की टीम दोबारा मौके पर पहुंची और बचे हुए अवैध हिस्सों पर बुलडोज़र चलाना शुरू किया। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी तरह की अराजक स्थिति न पैदा हो। टीम का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की जा रही है।

कथित राजनीतिक और सामाजिक कनेक्शन चर्चा में

स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि ये बारातघर कुछ प्रभावशाली लोगों या उनके करीबी लोगों से जुड़े हुए थे, जिसके कारण मामला और भी संवेदनशील हो गया। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया कि कार्रवाई किसी दबाव या पक्षपात से प्रेरित नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है। बताया जाता है कि दोनों बारातघरों की कीमत करोड़ों में है, इसलिए इनके ढहने से क्षेत्र में काफी चर्चा और आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण गलत था तो पहले समाधान और संवाद का रास्ता निकाला जाना चाहिए था, ताकि इलाके में तनाव की स्थिति न बने।

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