जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के जेहाद वाले बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। मौलाना ने हाल ही में एक कार्यक्रम में जेहाद से जुड़े बयान दिए थे, जिसके बाद कई राजनीतिक नेताओं ने उनकी आलोचना की। इसी क्रम में भाजपा के फायर ब्रांड नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम ने भी इस बयान का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से समाज में गलत संदेश जाता है और देश की एकता को नुकसान पहुँचता है। सोम ने Madani के बयान को “गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ” बताते हुए कहा कि इस तरह की सोच समाज को पीछे ले जाती है।
संगीत सोम की तीखी प्रतिक्रिया
संगीत सोम ने मीडिया से बातचीत करते हुए मौलाना मदनी को “बीमार मानसिकता वाला व्यक्ति” बताया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ऐसे बयान जारी रहे तो किसी दिन “सनातनी सड़क पर उतरकर जवाब देने को मजबूर हो सकते हैं।” सोम ने कहा कि वह किसी तरह की हिंसा की बात नहीं कर रहे, लेकिन आगाह जरूर कर रहे हैं कि समाज में तनाव पैदा करने वाले बयान किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग संविधान की बात तो करते हैं, लेकिन अपने हित में शरिया कानून की मांग भी उठाते हैं, जो कि विरोधाभासी है।
संविधान और शरिया कानून पर उठे सवाल
सोम ने यह भी कहा कि संविधान का सम्मान सभी को करना चाहिए, चाहे वह किसी धर्म से जुड़ा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग संविधान के नाम पर अपने अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन जब कर्तव्यों और समानता की बात आती है तो शरिया और धार्मिक कानूनों की चर्चा छेड़ देते हैं। सोम के अनुसार, “चार बीवी और 21 बच्चों” का तंज समाज में फैल रही गलतफहमियों और राजनीतिक बयानबाज़ी का हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दे जनता को गुमराह करने के लिए बार-बार उठाए जा रहे हैं।
जेहाद और आतंकवाद पर उठे सवाल
संगीत सोम ने मौलाना मदनी के जेहाद वाले बयान को देश में चल रही आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ते हुए कहा कि जब देश आतंकवाद से जूझ रहा है, तब ऐसे बयानों से लोगों के बीच भ्रम फैलता है। उन्होंने कहा कि यदि मौलाना को सच में देश की चिंता है, तो उन्हें आतंकवाद पर स्पष्ट बयान देना चाहिए। सोम के अनुसार, जेहाद को सही ठहराने वाले किसी भी बयान से समाज में असुरक्षा पैदा होती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में सभी धर्मों को सम्मान मिला है, लेकिन यह स्वतंत्रता किसी को हिंसा या उकसाने का अधिकार नहीं देती।
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